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Exclusive: आंवले की खटास डायबिटीज के मरीजों के लिए खास, सोबन सिंह जीना विवि अल्मोड़ा के शोध में खुलासा

Sat, 12 Jul 2025 02:19 PM IST
हीरा मेहरा संजय नयाल, संवाद

सार

आंवला मधुमेह पीड़ितों के लिए रामबाण से कम नहीं हैं। शोध में पाया गया है कि इसके नाै तत्व टाइप टू डायबिटीज के उपचार में कारगर साबित हो रहे हैं। यह रिसर्च सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने की है।
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आंवला
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विस्तार
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आंवले को यूं ही सुपरफूड नहीं कहा जाता। इसके अनोखे औषधीय गुण मधुमेह पीड़ितों के लिए रामबाण से कम नहीं हैं। शोध में पाया गया है कि इसके नाै तत्व टाइप टू डायबिटीज के उपचार में कारगर साबित हो रहे हैं। यह रिसर्च सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने की है।

आंवले को विज्ञान जगत में फिलैंथस एम्ब्लिका के नाम से जाना जाता है। एसएसजे विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने इसमें माैजूद खास तत्वों से टाइप टू डायबिटीज को खत्म करने में सफलता पाई है। शोध के दौरान पाया गया कि आंवले से मिले नौ तत्व मधुमेह से लड़ने में पूरी तरह सहायक हैं। टाइप टू डायबिटीज में शरीर में मौजूद पेरोक्सिसोम प्रोलिफरेटर एक्टिवेटेड रिसेप्टर गामा, जीएलपी वन एगोनिस्ट (ग्लूकागन लाईक पेप्टाइड वन रिसेप्टर एगोनिस्ट), एसजीएलटी 2 (सोडियम-ग्लूकोज को ट्रांसपोर्टर टू) प्रोटीन प्रभावित होते हैं। ये प्रोटीन ही शरीर में इंसुलिन बढ़ाते हैं, ग्लूकोज अवशोषण को नियंत्रित करते हैं और इंसुलिन की संवेदनशीलता को सुधारते हैं। संवाद

जान लीजिए इन लाभकारी तत्वों को

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शोधार्थियों ने आंवले से मधुमेह से लड़ने वाले गैलिक अम्ल, एलाजिक अम्ल, क्वेरसेटिन, कैम्फेरॉल, ल्यूटिओलिन, एम्ब्लिकेनिन ए और बी, कोरिलेजिन, चेब्यूलाजिक अम्ल, बीटा ग्लुकोगैलेन की पहचान की है।

ये गुण लाजवाब
आंवले में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीमाइक्रोबियल, एंटीफंगल, एंटीएलर्जिक, एंटीवायरल, एंटीकैंसर और एंटीडायबिटिक गुण मौजूद होते हैं। इसके पत्तों का उपयोग सर्दी, एनीमिया, पेचिश, बुखार, पथरी और घावों के इलाज में किया जाता है।

डायबिटीज के प्रकार

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मधुमेह के प्रकार टाइप वन डायबिटीज और टाइप टू डायबिटीज हैं। दोनों का संबंध शरीर में इंसुलिन हार्मोन से होता है। टाइप वन डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। इंसुलिन इंजेक्शन जरूरी होता है। टाइप टू डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन तो बनता है लेकिन शरीर उसका उपयोग ठीक से नहीं कर पाता। यह असंतुलित भोजन और निष्क्रिय जीवनशैली इसकी वजह रहता है।

डब्लूएचओ की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में करीब दो करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। यह आंकड़ा 2030 तक दोगुना होने की संभावना है। इनमें से 90 से 95 प्रतिशत टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित हैं। संवाद

ये रहे शोध में शामिल
वनस्पति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुभाष चंद्रा, डॉ. प्रियंका शर्मा, डॉ. तुषार जोशी, डॉ. तनुजा जोशी, प्रो. सुषमा टम्टा।

शोध को क्लीनिकल ट्रायल में भी सफलता मिलती है तो यह मधुमेह उपचार में बड़ी उपलब्धि होगी। इससे तैयार दवाएं मरीज के लिए सुरक्षित और काफी किफायती दामों पर उपलब्ध हो सकेंगी।- डॉ. प्रियंका शर्मा, शोधार्थी, एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोड़ा

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