रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन नगरी रानीखेत में वर्षों पहले प्रस्तावित रोपवे परियोजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। खनियां-चिलियानौला और रानीखेत-चौबटिया को रोपवे से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना शासन स्तर पर कार्रवाई के अभाव में फाइलों तक ही सीमित रह गई। अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पर्यटन कारोबारियों ने परियोजना को दोबारा शुरू करने की मांग तेज कर दी है।
पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के बावजूद रानीखेत में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का अभाव है। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं लेकिन नए आकर्षण विकसित नहीं होने से पर्यटन को अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही है। उनका मानना है कि रोपवे और प्रस्तावित हिमालय दर्शन केंद्र जैसी परियोजनाएं क्षेत्र के पर्यटन को नई पहचान दे सकती हैं।
पूर्व कुमाऊं मंडल विकास निगम के निदेशक सदस्य डीएन बड़ोला ने बताया कि खनियां-चिलियानौला रोपवे परियोजना का प्रस्ताव पूर्व में सरकार को भेजा गया था और इसकी योजना भी तैयार हुई थी। शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार को दोबारा पत्र भेजकर जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की गई है।
होटल एसोसिएशन रानीखेत के अध्यक्ष हिमांशु उपाध्याय ने कहा कि रानीखेत का गोल्फ मैदान, चौबटिया उद्यान, रानीझील और आसपास के धार्मिक व प्राकृतिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं लेकिन मनोरंजन और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं की कमी महसूस होती है। उनका कहना है कि रोपवे और हिमालय दर्शन केंद्र बनने से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पर्यटन कारोबार को नई दिशा मिलेगी।
चिलियानौला के पलिकाध्यक्ष अरुण रावत ने बताया कि रोपवे परियोजना से संबंधित पुराने अभिलेख और प्रस्ताव एकत्र किए जा रहे हैं। इसके बाद पालिका की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजकर खनियां-चिलियानौला रोपवे योजना को धरातल पर उतारने की मांग की जाएगी। इससे चिलियानौला और रानीखेत दोनों क्षेत्रों में पर्यटन को बड़ा लाभ मिलेगा।