दो दिवसीय तृतीय हिमालयी शोध छात्र संगोष्ठी में मौजूद अतिथिगण और वैज्ञानिक।
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जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान कोसी में दो दिवसीय तृतीय हिमालयी शोध छात्र संगोष्ठी का शुभारंभ हो गया है। वैज्ञानिकों ने हिमालयी राज्यों की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों में युवाओं द्वारा किए जा रहे शोध और अनुसंधान को उल्लेखनीय बताया। अतिथियों ने हिमालयी राज्यों में वनाग्नि जैसी समस्या का ठोस समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया। कार्यक्रम में हिमालयन शोध सार की पुस्तक का विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि आवासीय विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने कहा कि हिमालयी राज्यों में अनेक संस्थान शोध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने हिमालयी राज्यों में वनाग्नि जैसी समस्या का ठोस समाधान निकालने और जंगल लोगों की आर्थिक उन्नति में कैसे सहायक हो सकते हैं इस पर चिंतन करने पर जोर दिया। संस्थान के निदेशक प्रो. आरएस रावल ने युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों से किसी क्षेत्र में स्वतंत्र कार्य कर श्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर जोर दिया। मिशन के नोडल अधिकारी इंजीनियर किरीट कुमार ने बताया कि संगोष्ठी में जैव विविधता संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में चल रहे शोध कार्यों का विशेषज्ञों की ओर से मूल्यांकन होगा। वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के माउंटेन डिविजन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुब्रत बोस ने युवाओं से वैश्विक और स्थानीय दोनों दृष्टिकोणों के साथ कार्य करते हुए विकास के लक्ष्यों को देखने पर जोर दिया। संचालन डॉ. ललित गिरि और डॉ. रवींद्र वर्मा ने किया।
इस अवसर पर विभिन्न विवि से पहुंचे वैज्ञानिक प्रो. जेके गर्ग, डॉ. खुर्शीद अहमद, डॉ. डीके सिंह, डॉ. डीके सिंह, डॉ. डीसी उप्रेती, डा. सौरभ घोष, पीटर स्मेटसेक, कुसुम अरुणाचल, डॉ. दिनेश अग्रवाल, डॉ. इरफान राशिद, डॉ. इरफान, डॉ. संजय के उनियाल, डॉ. यशपाल शर्मा, डॉ. अनीता पांडे, डॉ. जीसी एस नेगी, डॉ. चंद्रशेखर, डॉ. रजंन जोशी, डॉ. संदीपन मुखर्जी, डॉ. आशुतोष तिवारी, डॉ. सुमित राय समेत विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न संस्थानों से आए शोधार्थियों के शोध कार्य का मूल्यांकन किया और उन्हें आवश्यक निर्देश एवं सुझाव दिए।