रूढ़िवादी विचारधाराओं को दरकिनार करते हुए रानीखेत की बेटी ने अपनी मां की चिता को मुखाग्नि दी है। लंबे समय से कैंसर से जूझ रही यहां जरूरी बाजार निवासी असहाय 54 वर्षीय कमला देवी का निधन शनिवार को हो गया। मां की चिता को मुखाग्नि देकर वैशाली ने बेटियों के संरक्षण का संदेश भी दिया है। कमला के उपचार के लिए स्थानीय लोगों ने आपसी सहयोग कर मदद भी कराई थी, कुछ समय बरेली में उनका उपचार भी चला, लेकिन वह बच नहीं पाई।
बीते मार्च माह में कमला के पति वीर राम की मृत्यु हो गई थी, दो पुत्रों का पूर्व में निधन हो चुका है। मां की मृत्यु के बाद अब 17 वर्षीय बेटी वैशाली अकेली रह गई हैं। वैशाली ने भी आज तमाम सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ते हुए यहां मुक्तिधाम में मां की चिता को मुखाग्नि दी, साबित कर दिया कि अब बेटी भी बेटे की तर्ज पर हर कार्य कर सकती है। बेटियों को हेय दृष्टि से देखने वाले समाज को भी उन्होंने आइना दिखाया है। वहां जनसेवा समिति के अध्यक्ष सतीश चंद्र पांडे, पूरन चंद्र, कामरान कुरैशी, नईम खान आदि थे।