महिला एकता परिषद की राजनीतिक पदयात्रा जारी है। पदयात्रा का शिलंग, टाना, ढूंगा आदि गांवों में स्वागत हुआ। इस दौरान महिलाओं में पहाड़ से पलायन और बंजर होती खेती की चिंता साफ झलक रही थी। कहा कि सरकारों की अनदेखी के चलते पहाड़ का विकास ठहर गया है। जनप्रतिनिधियों को पहाड़ की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। पहाड़ का विकास करने का आश्वासन देने वाले जनप्रतिनिधि को ही वोट देने का आह्वान किया गया।
राजनीतिक पदयात्रा शिलंग, टाना, ढूंगा, सनणें, मीनार सहित कई गांवों में पहुंची। इस दौरान कई स्थानों पर आम सभाओं का आयोजन किया गया। महिलाओं ने कहा कि अनदेखी के चलते पहाड़ का अस्तित्व रसातल में चला गया है। पलायन के कारण गांव के गांव खाली हो रहे हैं। सोना उगलने वाले खेत बंजर होने की कगार पर हैं। गांवों में रोजगार के संसाधन नहीं हैं, जिस कारण युवाओं का पलायन निरंतर बढ़ रहा है। सरकारों ने पिछले 16 सालों में पहाड़ के लिए ठोस कार्य नहीं किए, पहाड़ में स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी समस्याएं आज भी सामने खड़ी हैं। महिलाओं का आह्वान किया गया कि पहाड़ का महत्व, संस्कृति को समझने वाले जनप्रतिनिधि को ही वोट दिया जाए, जनप्रतिनिधियों से लिखित में लिया जाए कि वह उजड़ती खेती के मसले को विधानसभा में उठाएंगे। इस अवसर पर महिला एकता परिषद की मधुबाला कांडपाल, पुष्पा रावत, हेमा नेगी, सरस्वती देवी, भगवती तिवारी, कमला देवी, हंसी देवी, पार्वती देवी, दुर्गा देवी, माया देवी आदि मौजूद थे।