आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि प्रख्यात वैज्ञानिक भारत रत्न प्रो. सीएनआर राव मोबाइल फोन यूज नहीं करते। 81 वर्षीय प्रो. राव ने अमर उजाला से खास बातचीत में यह रहस्योद्घाटन किया। प्रो. राव ने कहा कि उन्हें मोबाइल से बात करना अच्छा नहीं लगता। उन्होंने कहा कि मोबाइल में बातें करने से मन खराब होता है। वह मोबाइल रखते जरूर हैं और विदेश जाने पर सिर्फ पत्नी से बात करके खैर खबर लेते हैं। इंटरनेट और लैपटॉप के अधिक उपयोग को भी प्रो. राव ठीक नहीं मानते।
प्रो. राव ने कहा कि इंटरनेट के जरिये इनफार्मेशन (सूचनाएं) प्राप्त की जा सकती हैं लेकिन नया विचार तो मन से ही आता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि साइंस की तरक्की से आज आदमी की औसत आयु बढ़ गई है। विज्ञान ने तरक्की के कई और भी रास्ते दिए हैं लेकिन भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोकने के लिए फिलहाल विज्ञान कुछ करने की स्थिति में नहीं है। भूकंप के बारे में अभी तक सही भविष्यवाणी करने की तकनीक भी विकसित नहीं हुई है। 81 वर्षीय प्रो. राव ने कहा कि जीवन में कुछ करने के लिए उम्र आड़े नहीं आती और आज भी उनका ज्यादातर समय प्रयोगशाला में ही बीतता है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में काम करने वाले उम्रदराज लोगों को युवाओं के साथ कंपटीशन करना चाहिए। उन्होंने कहा युवाओं में कुछ अलग करने की चाह होनी चाहिए। प्रो. राव ने रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का उदाहरण दिया, जिसमें यह संदेश दिया गया था कि वह रास्ता चुनो जिसमें कोई नहीं गया। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि अनुसंधान में वह क्षेत्र चुनो जिसमें पहले काम नहीं हुआ है।
पत्नी के बजाय विद्यार्थी के सवाल का जवाब
विभिन्न स्कूलों के बच्चों और वहां मौजूद लोगों ने प्रो. सीएनआर राव से विज्ञान के बारे में अनेक सवाल पूछे। इस मौके पर प्रो. राव की पत्नी इंदु राव ने भी एक सवाल के लिए हाथ उठाया लेकिन प्रो. राव ने उन्हें रोककर कहा कि पहले स्कूली बच्चे को पूछने दो।
प्रो. रमन की प्रेरणा से बने वैज्ञानिक
प्रो. राव ने कहा कि उन्हें वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा महान वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. सीवी रमन से मिली। उन्होंने बताया कि जब वह 13 साल के थे तो प्रो. रमन उनके स्कूल में आए थे। उसी दिन उन्होंने वैज्ञानिक बनने की ठान ली थी। मेरे पास बहुत पैसा नहीं है लेकिन मैं विज्ञान से प्रेम करता हूं और अपने जीवन से बहुत संतुष्ट हूं।
लैपटॉप में देखता हूं नाम क्या है
प्रो. राव ने लैपटॉप के बढ़ते प्रयोग पर व्यंग्य करते हुए कहा कि आज कई लोग लैपटॉप पर बहुत अधिक आश्रित हो गए हैं। उन्होंने अमेरिका का एक वाकया सुनाया कि जब एक व्यक्ति से किसी ने नाम पूछा गया तो वह कहने लगा रुकिए लैपटॉप पर देखता हूं। इस पर वहां ठहाके गूंज उठे।