पर्वतीय क्षेत्र में लुप्त हो रहे शिल्प, काष्ठ कला,
भवन निर्माण कला, ताम्र कला, ऐपण सहित अन्य परंपरागत कलाओं के संरक्षण और
विकास के लिए प्रदेश सरकार अनेक दावे कर रही है, लेकिन फिलहाल इस दिशा में
ठोस काम नहीं हो सका है।
पर्वतीय क्षेत्र की परंपरागत कला और शिल्प
को बचाने और संरक्षित करने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने करीब एक साल
पहले जिले के गुरुड़ाबांज में 100 करोड़ की लागत से हरिराम टम्टा पारंपरिक
शिल्प उन्नयन और प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने की घोषणा की थी, लेकिन अब
तक इस संस्थान के लिए सिर्फ 1.20 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं।
संस्थान
के लिए भूमि हस्तांतरित हो गई है परंतु अब तक काम आगे नहीं बढ़ सका है।
पर्वतीय क्षेत्र की भवन निर्माण कला, लकड़ी से बनाए जाने वाले बर्तन,
नक्काशीदार दरवाजे, खिड़की, ताम्र कला, परंपरागत वाद्ययंत्रों समेत अन्य
परंपरागत शिल्प विलुप्त हो रहा है।
इस तरह का काम करने वाले
शिल्पियों की नई पीढ़ी इस काम को छोड़ रही है, जिससे धीरे-धीरे यह परंपरागत
कला और शिल्प विलुप्त होता जा रहा है। पारंपरिक शिल्पों के विलुप्त होते
जाने से बेरोजगारी भी बढ़ती जा रही है।
एक साल पहले मुख्यमंत्री
हरीश रावत ने राज्य के पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण, उन्नयन और युवाओं को
पारंपरिक शिल्पों का प्रशिक्षण देने को गुरुड़ाबांज में शिल्पकार हरिराम
टम्टा के नाम पर पारंपरिक शिल्प उन्नयन और प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने
की घोषणा की थी।
इसके लिए 100 करोड़ का प्रावधान किया गया था। इसके
लिए शुरू में सिर्फ 1.20 करोड़ रुपये ही अवमुक्त हुए थे। इससे फिलहाल चहार
दीवारी आदि का कार्य ही हो पाया है। भवन का निर्माण अभी तक शुरू भी नहीं
हो पाया है।
हालांकि सरकार किसी भी स्थिति में 2017 के चुनाव से
पहले इस संस्थान को अस्तित्व में लाना चाहती है। संभावना है कि सात नवंबर
को राज्योत्सव के मौके पर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी इस
संस्थान का भी शिलान्यास कर सकती हैं।
संस्थान के नोडल अधिकारी फतेहबहादुर ने बताया कि उद्यान विभाग से संस्थान के नाम पर 73 नाली भूमि हस्तांतरित हो गई है।
शासन
से अब तक 1.20 करोड़ रुपये मिले हैं। इस धनराशि से कार्यदायी संस्था उप्र
निर्माण निगम चहार दीवारी और संस्थान परिसर में उद्यान विभाग के स्वामित्व
वाले कुछ पुराने भवनों के नवीनीकरण का काम किया जा रहा है।
जागेश्वर
के विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि परंपरागत शिल्प के संरक्षण,
संवर्धन के साथ ही हुनरमंद शिल्पियों को तैयार करने में संस्थान की
महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि संस्थान के नाम भूमि
हस्तांतरित होने की प्रक्रिया पूरी हो गई है और चहारदीवारी का काम प्रगति
पर है। अब आगे के निर्माण कार्यों के लिए भी बजट जल्द मिलेगा।
कुंजवाल
ने बताया कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चालू वित्त वर्ष में ही 15 करोड़
रुपये देने की घोषणा की है, जल्द ही धनराशि अवमुक्त होने के बाद भवन
निर्माण का काम शुरू होगा।