छात्रावास भवन पर पेड़ गिरने का खतरा
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अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय स्थित महिला पॉलीटेक्निक के तीन हॉस्टिलों में रह रहीं छात्राओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है। स्थापना के करीब तीन दशक बाद भी संस्थान की चहार दीवारी नहीं हो सकी है। बाउंड्रीवॉल नहीं होने से दिन में आवारा जानवर परिसर में घूमते रहते हैं और रात में भी जगंली जानवरों और असामाजिक तत्वों का खतरा रहता है। 80 लाख खर्च होने के बावजूद कर्मचारियों के आवासीय परिसरों का निर्माण आठ साल से अधर में है।
नगर के कुछ दूरी पर 1987 में महिला पॉलीटेक्निक स्थापित हुआ। कुछ सालों में कार्यशाला, प्रशासनिक भवन, लैब, कक्षा कक्ष, हॉस्टिल आदि भवन तैयार हो गए, लेकिन 104 नाली भूमि की चहारदीावारी 29 साल बाद भी नहीं बन सकी है। संस्थान परिसर में विंध्यवासिनी, सिद्धिदात्री, शैलपुत्री नाम ने तीन महिला छात्रावास बने हैं।
तीनों छात्रावासों में 148 प्रशिक्षणार्थियों रहने की व्यवस्था है। पॉलीटेक्निक परिसर जंगल से घिरा है। चहारदीवारी नहीं होने से रात के समय जंगली जानवरों और असामाजिक तत्वों के घुस आने का भय बना रहता है वहीं दिन में भी आवारा जानवरों की आवाजाही रहती है।
सरकार ने संस्थान कर्मियों के लिए टाइप टू, थ्री और फोर के बारह आवासों के लिए 80 लाख रुपये का बजट उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को आवंटित किया। कार्यदायी संस्थान ने बजट खर्च तो कर दिया, लेकिन आठ साल बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में कर्मचारी मंहगे किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं।
प्रधानाचार्य वीके गुप्त ने बताया कि रात में सुरक्षा के लिए तीन पीआरडी जवान तैनात रहते हैं। चहारदीवारी नहीं होने से सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौती है। चहारदीवारी के लिए कई बार प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। अधूरे आवासीय परिसरों का काम पूरा कराने को कार्यदायी संस्था द्वारा शासन को भेजे गए करीब 73 लाख के संशोधित आगणन को भी शासन की स्वीकृति नहीं मिली है।