चौखुटिया (अल्मोड़ा)। पीपीपी मोड में संचालित सीएचसी में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं से लोग परेशान हैं। तीन साल में भी मानकों के अनुरूप चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो पाई है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के न होने से तो मरीज परेशान हैं वहीं दवा के साथ-साथ सामान्य जांच के लिए भी लोगों को बाजार आना पड़ रहा है।
एक तरह से पीपीपी मोड के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट के सिवाय कुछ हासिल नहीं हो पा रहा है। शील नर्सिंग होम प्राइवेट लिमिटेड के अधीन पीपीपी मोड में संचालित सीएचसी बेदम हो गया है। यदि कोई सुधलेवा होता तो अनुबंध के दो साल नौ माह पूरे होने के बावजूद ये दुर्दशा नहीं होती।
सीएचसी की खामियों को लेकर पिछले दो सालों से लिखते लिखते कलम की स्याही सूखने को है, परंतु इसके बावजूद इसके लिए जिम्मेदार शासन, विभागीय अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। हालत यह है कि प्रबंध तंत्र पूरी तरह से मनमानी पर उतर आया है।
शनिवार को 11:15 बजे अमर उजाला टीम द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण के दौरान बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ की कुर्सी खाली मिली। सर्जन का कक्ष बंद पड़ा था। यही नहीं फिजीशियन, रेडियोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर लंबे समय बाद भी किसी की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
निरीक्षण के दौरान मुख्य केबिन में सरकारी स्तर पर तैनात डॉ. अमजद खान के साथ पीपीपी मोड के दो अन्य चिकित्सकों के अलावा नेत्र, दंत चिकित्सक, फार्मेसिस्ट, एक्सरे टेक्नीशियन आदि मौजूद थे। स्वास्थ्य केंद्र में मानकों के अनुसार चिकित्सकों की भारी कमी के साथ ही दवाओं का भी अभाव चल रहा है। जिसके चलते मरीजों को बाजार से दवा लानी पड़ रही है। यही नहीं लैब टेक्नीशियन तैनात होने के बावजूद मरीजों से जांच बाहर से कराई जा रही है। रेडियोलॉजिस्ट के न होने से अल्ट्रासाउंड मशीन भी बंद है।
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। डीजी स्वास्थ्य के साथ 14 मई 2013 को हुए शील नर्सिंग होम प्रबंधन के अनुबंध के आधार पर पीपीपी मोड में संचालित सीएचसी में एक जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, एनेस्थीसिया, आई सर्जन, दंत रोग विशेषज्ञ, दो जनरल ड्यूटी चिकित्सा अधिकारी सहित कुल 12 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती अनिवार्य है।
तैनात चिकित्सकों को पांच साल का अनुभव होना भी अनिवार्य है। अनुबंध में चार सीएचसी में एक नेत्र चिकित्सक की बात कही गई है। इधर पीपीपी मोड के प्रबंधक भरत बिष्ट, डॉ. विनोद वर्मा का कहना है कि खाली पदों पर चिकित्सकों की तैनाती शीघ्र की जा रही है।
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। स्वास्थ्य केंद्र में तेज बुखार के चलते भर्ती टिम्टा निवासी आशा देवी और उसकी मां भगा देवी बताती हैं कि वे पिछले चार दिनों में साढे़ तीन हजार से भी अधिक की दवा बाजार से ला चुके हैं। उनसे खून की जांच भी बाहर से कराई गई। इसी तरह जमणियां की भगवती देवी ने भी अधिकांश दवाएं बाजार से मंगवाने की बात कही है।
मरीजों ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र से सिर्फ ग्लूकोज ड्रिप आदि दी जा रही है। स्वास्थ्य केंद्र में लैब टेक्नीशियन के तैनात होने के बावजूद बाहर से जांच कराए जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि संबंधित चिकित्सक खास व्यक्ति का नाम लेकर खून आदि की जांच के लिए बाहर भेज रहे हैं। बताया गया कि इसमें कमीशनबाजी का खेल चल रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अमजद खान का कहना है कि दवाओं की कमी के चलते कतिपय जरूरी दवाएं बाहर से लिखी जा रही हैं। चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए पीपीपी मोड के संचालक से लगातार कहा जा रहा है। व्यवस्था में हर संभव सुधार की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर चीफ फार्मेसिस्ट डीसी बिष्ट का कहना है कि दवाएं पर्याप्त मात्रा में हैं। दस दिन पूर्व ही काफी मात्रा में दवाएं पहुंची हैं।