अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री की घोषणा धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सरकार ने बहनों को रोडवेज बसों में मुफ्त सफर का तोहफा तो दे दिया, लेकिन कई रूटों पर सरकारी बसों का अता-पता ही नहीं है। ऐसे में बसों के अभाव में इस बार भी हजारों बहनें इस मुफ्त सुविधा से पूरी तरह महरूम रहेंगी। त्योहार के दिन उन्हें मजबूरन निजी टैक्सियों और डग्गामार वाहनों में अपनी जेब ढीली कर सफर का कड़वा घूंट पीना पड़ेगा।
जिला मुख्यालय स्थित उत्तराखंड परिवहन निगम डिपो से देहरादून, टनकपुर, दिल्ली, हरिद्वार, चंडीगढ़, बेतालघाट-दिल्ली, मासी, लखनऊ, गुरुग्राम आदि रूटों पर 14 सेवाएं संचालित होती है। अधिकांश सेवाएं मैदानी रूटोंपर ही दौड़ती है। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर 27 और 28 अगस्त को बहनों के लिए रोडवेज बसों में निशुल्क सफर की सुविधा का एलान किया है लेकिन अल्मोड़ा से झूलाघाट, धारचूला, भनोली, खेती, ध्याड़ी, चलछीना, शीतलाखेत, नैनीताल, जैंती आदि रूटों पर बसों का संचालन नहीं होता है।रक्षाबंधन पर बहनों को मुफ्त बस सफर की सरकारी सौगात केवल उन्हीं रूटों तक सिमट कर रह गई है जहां रोडवेज की गाड़ियां चलती हैं। जिले के कई अंदरूनी और मुख्य ग्रामीण रूटों पर रोडवेज सेवा शून्य होने के कारण सरकार का यह दावा पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है।
आलम यह है कि 27 और 28 अगस्त को भाइयों की कलाई पर राखी बांधने निकलने वाली बहनों को निजी ऑपरेटरों की बसों और टैक्सियों में मनमाना किराया चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। डिपो के एजीएम धर्मानंद जोशी ने बताया कि डिपो से 14 सेवाएं संचालित होती है। जहां सेवाएं है वहां बहनों को नियमानुसार लाभ मुफ्त सफर का लाभ दिया जाएगा।