स्थानीय लोग बताते हैं कि एक समय इन फव्वारों के आसपास लोगों का जमावड़ा लगता था। शाम को बिजली की रौशनी में गिरता पानी पार्क और नगर की सुंदरता पर चार चांद लगाता था। बदहाली के चलते कभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों की चहलकदमी से गुलजार ये पार्क भी अब वीरान हैं। दोनों पार्क में पहले बच्चों के मनोरंजन के लिए भी पर्याप्त संसाधन थे जो अब गायब हो गए हैं। ऐसे में बच्चे इन पार्क का रुख नहीं करते और ये अराजक तत्वों का अड्डा बन गए हैं।
Iदोनों पार्क में फव्वारों को ठीक कर फिर इन्हें संचालित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है जल्द ये फव्वारे फिर से नगर की शान बढ़ाएंगे।I
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-भरत त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका, अल्मोड़ा।I