अल्मोड़ा। सल्ट ब्लॉक के जमरिया गांव को जोड़ने वाली करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी लिंक रोड बदहाली का शिकार है। विधायक निधि से बनी इस सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं। कई स्थानों पर सड़क किनारे बनी सुरक्षा दीवारें ढह चुकी हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। बरसात के दौरान पहाड़ी से मलबा, पत्थर और रोड़ी सड़क पर आने से मार्ग बार-बार बाधित हो जाता है।
विडंबना यह है कि इसी सड़क के डामरीकरण और सुधारीकरण के लिए 37.15 लाख रुपये की लागत से कार्य का शिलान्यास पांच सितंबर 2017 को शहीद दिवस के अवसर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था। शिलान्यास पत्थर पर तत्कालीन सांसद अजय टम्टा, मंत्री धन सिंह रावत, तत्कालीन विधायक सुरेंद्र सिंह जीना समेत रघुनाथ सिंह चौहान, रेखा आर्या और तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती मेहरा सहित कई जनप्रतिनिधियों के नाम अंकित हैं। शिलान्यास पत्थर आज भी नेताओं के नाम की गवाही दे रहा है, लेकिन सड़क की हालत सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों के अनुसार करीब छह वर्ष पहले सड़क पर लाखों रुपये की लागत से डामरीकरण कराया गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद डामर उखड़ने लगा और सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई। वर्तमान में कई स्थानों पर सड़क का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त है। सुरक्षा दीवारें टूटकर नीचे गिर चुकी हैं। बरसात में मलबा आने पर ग्रामीणों को स्वयं जेसीबी लगाकर मार्ग खोलना पड़ता है। खराब सड़क के कारण दोपहिया वाहन चालक रपटकर चोटिल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने लोक निर्माण विभाग से कई बार सुधारीकरण की मांग की, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेताया कि सड़क का और हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ तो गांव की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो सकती है।
ग्राम प्रधान, सुमन भदोला ने बताया कि जमरिया लिंक रोड की वर्तमान हालत बेहद खराब है। सड़क के सुधारीकरण के लिए कई बार विभाग और प्रशासन को प्रस्ताव दिए गए, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बरसात में मलबा आने के बाद ग्रामीणों को खुद जेसीबी लगाकर मार्ग खोलना पड़ा। सड़क की कई सुरक्षा दीवारें टूटकर नीचे गिर चुकी हैं, जिससे सड़क का काफी हिस्सा प्रभावित हो गया है।
प्रधान पति, मोहन भदोला ने बताया कि सड़क की हालत लगातार खराब होती जा रही है। कई जगह सड़क की सुरक्षा दीवारें टूट चुकी हैं और मार्ग का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो रहा है। यदि सड़क का थोड़ा सा हिस्सा भी और टूटा तो जमरिया गांव की आवाजाही पूरी तरह बंद हो जाएगी। बरसात में ग्रामीण खुद मलबा हटाकर रास्ता खोल रहे हैं, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।