पर्वतीय क्षेत्र के औद्यानिक विकास को लेकर यहां स्थापित उद्यान निदेशालय रसातल में जा रहा है। विभाग के पुनर्गठन में निदेशालय को महत्वहीन बना दिया गया है, नियमित रूप से अधिकारी यहां नहीं बैठते। क्षेत्र के विभिन्न संगठनों के लोगों ने उद्यान निदेशक डा. बीएस नेगी से मुलाकात कर कहा कि अन्य दफ्तरों की तरह निदेशालय को भी देहरादून शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है ।
संगठनों ने कहा कि निदेशालय की स्थापना के बाद यहां भरपूर अधिकारी, कर्मचारी थे, वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर काश्तकारों को कृषि, बागवानी, फलोत्पादन की जानकारी देते थे, लेकिन राज्य बनने के बाद निदेशालय रसातल में जा रहा है। अब यहां स्वदेशी सेबों का तक उत्पादन नहीं होता। गार्डन के हालात दिन प्रतिदिन खराब हो रहे हैं। अधिकारी तक यहां नियमित रूप से नहीं बैठते, विभाग के पुनर्गठन में भी निदेशालय को महत्व नहीं दिया गया है। अधिकारियों की फौज बढ़ाकर, निचले पदों को कम किया जा रहा है।
कहा कि जिस तरह से सारे कार्य देहरादून से संपादित हो रहे हैं, उससे यह जाहिर होता है कि योजनाबद्ध तरीके से निदेशालय को देहरादून शिफ्ट करने की योजना है। कहा कि इसी तरह से पूर्व में रानीखेत से कई कार्यालय अन्यत्र शिफ्ट हो चुके हैं। निदेशक से मिलने वालों में छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी, सभासद विनोद चंद्र, दीप भगत, हंसादत्त बवाड़ी, विनोद भार्गव सहित तमाम लोग शामिल थे। निदेशक बीएस नेगी ने आश्वस्त किया कि निदेशालय कहीं शिफ्ट नहीं हो रहा है। देहरादून से ही योजनाएं बनती हैं। विभाग को ढर्रे पर लाने के प्रयास चल रहे हैं। निदेशालय के विकास को लेकर भी नए सिरे से कार्य हो रहा है।