मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया(एमसीआई) का स्वरूप बदलकर नेशनल मेडिकल कमीशन किए जाने के विरोध में मंगलवार को जिले के सभी प्राइवेट अस्पताल बंद रहे। डॉक्टरों का कहना था कि मेडिकल काउंसिल का स्वरूप बदले जाने से जहां मेडिकल कालेज की पढ़ाई महंगी हो जाएगी वहीं इससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्राइवेट डॉक्टरों ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थान पर नेशनल मेडिकल कमीशन बिल संसद में लाए जाने का विरोध करते हुए मंगलवार को अपने अस्पताल बंद रखकर विरोध जताया। यहां हुई डॉक्टरों की बैठक में कहा कि इससे चिकित्सा शिक्षा तो महंगी होगी ही, मरीजों का खर्च भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि स्वरूप बदलने के बाद मेडिकल कमीशन में पांच राज्यों का प्रतिनिधित्व ही होगा, जबकि 24 राज्यों को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। उन्होंने बिल को जन विरोधी बताते हुए सरकार से मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का स्वरूप नहीं बदलने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि इससे विदेशी छात्रों के लिए तो मेडिकल के रास्ते खुल जाएंगे, लेकिन भारतीय छात्रों के लिए दरवाजे बंद हो जाएंगे। यही नहीं राज्य काउंसिल का वजूद भी खत्म हो जाएगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। मंगलवार को ग्रामीण इलाकों से कई मरीज प्राइवेट अस्पतालों में दिखाने पहुंचे, लेकिन अस्पताल बंद होने के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा। हालांकि सरकारी अस्पताल खुले रहने से उन्हें खास दिक्कत नहीं हुई। बैठक में डा. ललित पंत, डा. एनएस चौहान, डा. एपी पांडे, डा. जीसी पांडे, डा. एएस गुसांई, डा. मुकेश जोशी, डा. एनसी मिश्रा, डा. जेसी दुर्गापाल और डा. बीसी पुनेठा मौजूद रहे।