जिले का सबसे बड़ा राशन गोदाम आज भी जिला पंचायत के रहमोकरम पर है। मालरोड स्थित जिला पंचायत के जिस पुराने डाक बंगले में यह गोदाम संचालित है, वहां अब जनता का राशन सुरक्षित नहीं है।
डाक बंगला जर्जर हाल में है। बरसाती पानी और चूहे आए दिन राशन को नुकसान पहुंचाते हैं। पन्नी के पैबंद लगाकर राशन की सुरक्षा की जा रही है। इसका खामियाजा सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं को भोगना पड़ रहा है। दूसरी तरफ नए गोदाम के निर्माण को लेकर विभाग सोया हुआ है।
पूर्ति विभाग के पास जमीन नहीं होने के कारण पहले यह गोदाम कालिका में था। 38 वर्ष पूर्व गोदाम को यहां मालरोड स्थित जिला पंचायत के डाक बंगले में शिफ्ट किया गया। अल्मोड़ा जिले में रानीखेत का राशन गोदाम सबसे बड़ा गोदाम है। हर माह यहां चीनी, चावल, गेहूं की 36 सौ बोरी राशन पहुंचता है।
द्वारसौ, कुंवाली, तिपौला, गगास, चौकुनी, भुजान, चापड़, हिड़ाम, मुसोली, बगवान, विशालकोट जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में यहां से राशन सप्लाई होता है। अब यह भवन जीर्ण हालत में है। टिन की छतें बरसात में टपकती हैं, जिस कारण राशन को नुकसान पहुंचता है, हालांकि टपकने वाले स्थानों पर विभाग ने त्रिपाल, पन्नी के पैबंद लगाए हैं।
दूसरी तरफ नुकसान के मामले में चूहे भी पीछे नहीं रहते। आए दिन राशन का नुकसान होता है, इसका खामियाजा सस्ता गल्ला विक्रेताओं को भोगना पड़ता है।
सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता संघ के अध्यक्ष हेमंत रौतेला ने बताया कि रानीखेत जिले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है, लेकिन इतने बड़े क्षेत्र में राशन ही सुरक्षित नहीं है। विभाग को शीघ्र नया गोदाम खोलना चाहिए।