जिला बार एसोसिएशन की बैठक में अधिवक्ता पीसी तिवारी के साथ किए गए अमानवीय व्यवहार, मारपीट और झूठे मुकदमे दर्ज करने की निंदा की गई। बार ने तिवारी के मामले में न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
इसे लेकर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आदि अधिकारियों से मिलने का निर्णय लिया गया। बार ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग और अधिवक्ताओं के सम्मान को ठेस पहुंचने की कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार पांच फरवरी को न्यायिक कार्यों से विरत रहने का निर्णय लिया है।
कलक्ट्रेट स्थित बार भवन में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता तिवारी के मामलेे को लेकर 28 जनवरी को डीएम को ज्ञापन दिया था, लेकिन इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। श्री तिवारी द्वारा दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई इससे प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई की मंशा साफ जाहिर होती है।
तीन दिन के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर एसोसिएशन ने आंदोलन का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि तिवारी के मामले में न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया है। इसे लेकर अधिवक्ताओं का शिष्टमंडल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, अल्मोड़ा के प्रशासनिक जज, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड से मिलेगा। सभा की अध्यक्षता बार के अध्यक्ष भानु तिलारा और संचालन महासचिव पंकज लटवाल ने किया।
बैठक में गोकुल जोशी, शेखर लखचौरा, जगत रौतेला, भूपाल सिंह नेगी, खीम सिंह बिष्ट, जगदीश पांडे, जगदीश तिवारी, महेश परिहार, महेश चंद्र, पीसी तिवारी, देवश बिष्ट, कुंवर सिंह बिष्ट, गजेंद्र मेहता, पंकज आर्या, भावना जोशी, मनोज जोशी, मनोज पंत, योगेंद्र नयाल, मुरली भट्ट, भगवती प्रसाद पंत, भूपेश कांडपाल, रवींद्र बिष्ट, डीडी तिवारी, विनोद पंत, गोपाल साह, डीसी साह, दीवान लटवाल, जीवन गुप्ता, हरीश बोरा आदि उपस्थित थे।
उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने नानीसार मामले में मुख्यमंत्री हरीश रावत को खुली बहस की चुनौती दी है। जेल से छूटने के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हरीश रावत उनसे ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन के दौर से बैर रखते हैं और इसी कारण सीएम ने उन्हें पिटवाकर झूठे मामलों में जेल भिजवा दिया। जबकि उन्होंने कभी ऐसी भावना नहीं रखी।
तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत शुरूसे ही यह कहते आए हैं कि स्थानीय जनता विरोध करेगी तो वह जिंदल ग्रुप को जमीन का आवंटन रद्द कर देंगे। मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि क्षेत्र के लोगों के विरोध के बावजूद आवंटन रद्द क्यों नहीं किया जा रहा है।
तिवारी ने कहा कि जांच के बिना किसी के खिलाफ एससीएसटी एक्ट में कार्रवाई नहीं की जा सकती, लेकिन सरकार के इशारे पर रेखा धस्माना और उन पर एससीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि नानीसार में संदिग्ध और बदमाश किस्म के लोगों का अड्डा बन गया है और वहां अवैध हथियार भी रखे गए हैं।
इन्हीं लोगों ने 26 जनवरी को राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया लेकिन तिरंगे का अपमान करने वालों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने बताया कि आगामी आठ फरवरी को अल्मोड़ा में जवाब दो रैली आयोजित की जा रही है। उन्होंने समर्थन करने वाले सभी लोगों का आभार जताते हुए आठ फरवरी की रैली में हिस्सा लेने का आह्वान किया।
पत्रकार वार्ता में मौजूद आंदोलनकारी रेखा धस्माना ने कहा कि जिंदल के लोगों ने उनकी बेरहमी से पिटाई करने के साथ ही अभद्रता भी की लेकिन प्रशासन ने पिटाई करने वालों पर तो कार्रवाई नहीं की उल्टा उन्हें जेल भेज दिया।
रेखा धस्माना ने कहा कि महिलाओं को रात में गिरफ्तार करने के आदेश नहीं हैं, लेकिन उन्हें 11 बजे रात गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि हालात यह थे कि उन्हें अस्पताल में देखने पहुंची 66 वर्षीय रिटायर शिक्षिका आनंदी वर्मा को भी प्रशासन ने जेल भेज दिया। इस मौके पर जीवन चंद्र जेसी आदि मौजूद थे।