उत्तराखंड आरटीई फोरम द्वारा यहां आयोजित शिक्षक-एसएमसी सम्मेलन में मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. ईश मिश्रा ने कहा कि आदिकाल से ही शासक वर्ग के लिए शिक्षा एक महत्वपूर्ण औजार रहा है। आज शिक्षा का ज्ञान से संबंध टूट चुका हैै और अतिरिक्त पूंजी और निवेश के संकट के कारण शिक्षा एक बड़ा बाजार बन चुका है। देश में संपूर्ण शिक्षा का सार्वभौम राष्ट्रीकरण होना चाहिए।
प्रो. मिश्रा ने प्राथमिक शिक्षक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी ने सार्वजनिक शिक्षा की उपेक्षा पर चिंता जताई। आरटीई फोरम के राज्य संयोजक रघु तिवारी ने कहा कि आज प्रदेश में सात हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं और हजारों बच्चे स्कूलों से बाहर हैं। उन्होंने शिक्षा बजट में लगातार कटौती पर चिंता जताई और निजी क्षेत्र की शिक्षा के लिए नियामक ढांचा बनाने की मांग की।
अध्यक्षता करते हुए गढ़वाल विवि के प्रो. मोहन पवार ने उच्च शिक्षण संस्थानों के गिरते स्तर को प्राथमिक स्तर से ऊंचा उठाने पर जोर दिया।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के महामंत्री संजय बिष्ट ने शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कामों को शिक्षा अधिकार कानून के खिलाफ बताया। चमोली के शिक्षाविद प्रेम सनवाल ने प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एसएमसी को और अधिकार देने पर बल दिया। गढ़वाल मंडल के शिक्षक नेता मुकेश बहुगुणा ने कहा कि शिक्षा केवल सरकारों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती है। फोरम की नीलिमा भट्ट ने पावर प्वाइंट के माध्यम से आरटीई के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर शिक्षा का बाजारीकरण रोकने समेत कई प्रस्ताव पारित किए गए।
सम्मेलन में सांसद प्रतिनिधि जगदीश पांडे, उदय किरौला, नीरज पंत, प्रदीप गुरुरानी, संदीप कुमार, अनीता देवी, मंजू देवी, कैलाश तिवारी ने विचार रखे। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक कल्याण सिंह मनकोटी को फोरम की ओर से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में किरन आर्या, शेखर जोशी, जगदीश कुमार आदि मौजूद थे।