लंबी प्रतीक्षा के बाद आखिरकार कोसी बैराज के गेट शुक्रवार सायं पांच बजे बंद कर दिए गए और बैराज में पानी भरना शुरू हो गया है। बैराज में पानी भरने के बाद गरमी के सीजन में शहर और आसपास के क्षेत्रों में जल संकट से निजात मिलेगी। बैराज के समीप ही पेयजल निगम निर्माण शाखा द्वारा इंटेकवैल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। अमर उजाला ने गेट बंद न होने पर पानी का संकट गहराने के संबंध में विस्तृत खबरें छापी थीं।
शहर और आसपास के क्षेत्रों में कोसी नदी से पेयजल की आपूर्ति होती है। कोसी नदी में स्थापित पंप काफी पुराने हो गए हैं। जिनसे जरूरत के मुताबिक पानी सप्लाई नहीं हो पाता है। 18 एमएलडी पानी की जरूरत है, लेकिन जल संस्थान मात्र आठ से नौ एमएलडी पानी ही सप्लाई कर पाता है। गरमी के सीजन में जल संकट गहरा जाता है। पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए कोसी नदी में बैराज बना गया है। वहीं कोसी नदी में बैराज के निकट 10.87 करोड़ से इंटेकवैल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इंटेकवैल के निर्माण के चलते बैराज को पूर्व में खाली किया गया था।
शासन से पर्याप्त बजट नहीं मिलने पर इंटेकवैल के निर्माण कार्य में तेजी नहीं आ पा रही है। अब तक मात्र 2.5 करोड़ रुपये ही निर्माण शाखा उत्तराखंड पेयजल निगम को मिले हैं। इंटेकवैल की खुदाई से नदी में जमा मिट्टी को निर्माण एजेंसी ने हटा दिया है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि शुक्रवार शाम को पांच बजे बैराज के गेट बंद कर दिए हैं और बैराज में पानी भरना शुरू हो गया है। इस मौके पर निर्माण शाखा उत्तराखंड पेयजल निगम के अपर सहायक अभियंता वाईएस लस्पाल भी मौजूद थे। इससे पूर्व जल निगम के अधीक्षण अभियंता डीके पंत, सिंचाई विभाग के ईई विनोद कुमार, निर्माण शाखा उत्तराखंड पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता एन लाल ने भी बैराज का मौका मुआयना किया।