अल्मोड़ा। सरकारें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गांवों को सड़क से जोड़ने के दावे करती रहती हैं, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों के गांव सात दशक बाद भी सड़क से नहीं जुड़ सके हैं। भनोली तहसील के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हरि दत्त पांडे के गांव चिमखोली तक सड़क नहीं पहुंच सकी है।
ग्रामीण सड़क तक पहुंचने के लिए पांच किमी की पैदल दूरी तय करते हैं। यह गांव जिले का सीमांत गांव है। यदि यह सड़क बन जाए तो अल्मोड़ा जिले के दूरस्थ गांवों के अलावा पिथौरागढ़ जिले की गंगोलीहाट तहसील के 12 गांव यातायात से जुड़ सकेंगे।
अल्मोड़ा जिले के सीमांत गांव बिबड़ी, कुनगड़ा, चिमखोली, दयोलीबगड़, पिथौरागढ़ जिले के रौतेला गांव सिमना, बांगरौ आदि गांव यातायात से वंचित हैं। स्वतंत्रता सेनानी हरिदत्त पांडे के गांव चिमखोली को सड़क से जोड़ने का प्रस्ताव सालों से ठंडे बस्ते में है। मयोली बैंड से चिमखोली तक सात किमी सड़क निर्माण को लोनिवि ने पूर्व में प्रस्ताव तैयार कर सर्वे भी की।
दो साल पहले लोनिवि निर्माण खंड ने सर्वे कर पत्रावली तैयार की। पत्रावली नोडल कार्यालय देहरादून भेजी लेकिन सड़क को वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिली। यदि यह सड़क बन जाती है तो जिले के सरयू नदी से लगे इन गांवों के अलावा गंहोलीहाट तहसील के छह से अधिक गांवों को लाभ मिलेगा। भविष्य में सरयू नदी में पुल बनाकर सड़क को चौरपाल में मिला दिया जाए तो गंगोलीहाट से अल्मोड़ा की दूरी 75 किमी कम हो जाएगी।
वर्तमान में चिमखोली क्षेत्र के लोगों को गंगोलीहाट जाने के लिए करीब 100 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक पांडे का कहना है कि केंद्र सरकार ने पांच हेक्टेयर तक वन भूमि मंजूरी का अधिकार राज्य सरकार को दिया है, लेकिन राज्य सरकार जानबूझकर सड़क का निर्माण लटका रही है और वन भूमि की स्वीकृति नहीं दे रही है।
अल्मोड़ा। सरयू घाटी क्षेत्र के चिमखोली, बिबड़ी, कुनगड़ा, द्योलीबगड़ आदि गांवों में गेहूं, धान, आम, पपीता, अमरूद, केले के अलावा सब्जी का बहुतायत में उत्पादन होता है, लेकिन सड़क न होने से किसानों की फसल बरबाद हो जाती है और वह विपणन नहीं कर पाते हैं।