प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में नाममात्र का ही रेल नेटवर्क है। विषम परिस्थितियों के बावजूद गुलामी के दौर में ही अंग्रेजों ने पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों तक रेल पहुंचा दी थी।
वर्तमान दौर में विश्व में काफी तेज और सटीक तकनीक का विकास हो गया है, लेकिन आजादी के छह दशक से अधिक गुजर जाने के बाद भी राज्य में रेल लाइन बिछाने के प्रस्ताव अधaर में हैं। आगामी रेल बजट से एक बार फिर से लोगों को पहाड़ी क्षेत्रों में घोषित योजनाओं के निर्माण को धनराशि मिलने की उम्मीद है।
राज्य के टनकपुर-बागेश्वर, रामनगर-चौखुटिया, कर्णप्रयाग, गैरसैंण आदि इलाकों को रेल से जोड़ने की योजना काफी पुरानी है। रेल मंत्रालय को वर्तमान बजट में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र की प्रस्तावित योजनाओं में जरूरत के मुताबिक बजट देकर तेजी से काम शुरू कराना चाहिए।