जीर्ण हालत में राम सिंह धौनी आश्रम।
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शहीदों की याद में सालम के जैंती में स्थापित आश्रम जीर्ण-शीर्ण हालत में है। आश्रम की छत टूटने लगी है और दीवारों से पत्थर गिर रहे हैं। आसपास झाड़ियां और घास उग आई है। इससे पूरा आश्रम झाड़ियों में छुप गया है। आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारी इस आश्रम में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तय करते थे, लेकिन आज यह आश्रम बदहाल हो गया है।
आजादी की लड़ाई में सालम के कई क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया था। क्रांतिकारी राम सिंह धौनी की मृत्यु के बाद पंडित दुर्गा दत्त शास्त्री, षष्टी दत्त पांडे, इंद्रदेव कांडपाल, डिकर सिंह धानक आदि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने 1935 में सालम (जैंती) में शहीदों की स्मृति में आश्रम की स्थापना की थी। स्थापना के बाद से ही यह आश्रम स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा। उत्तराखंड बनने के बाद सरकारों ने शहीदों की स्मृति में बने स्मारकों के संरक्षण के प्रति तमाम घोषणाएं कीं, लेकिन इस आश्रम की सुध आज तक किसी ने भी नहीं ली। शहीदों की स्मृति में बना आश्रम आज बदहाल हो गया है।काफी संख्या में लोग इस आश्रम को देखने आते थे। शोध छात्र और इतिहासकार भी अध्ययन के लिए पहुंचते थे, लेकिन आज आश्रम वीरान है। क्षेत्र पंचायत सदस्य धना धौनी ने आश्रम के पुनर्निर्माण की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि आश्रम की हालत नहीं सुधरी तो स्थानीय ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।