चिन्हीकरण की मांग पूरी नहीं होने से गुस्साए राज्य आंदोलनकारियों ने सोमवार से यहां नगर पंचायत परिसर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। राज्य आंदोलनकारी मोहन सिंह रावत अनशन पर बैठे। उनका माल्यार्पण किया गया। मालूम हो कि चिन्हीकरण से वंचित द्वाराहाट और चौखुटिया के एक दर्जन राज्य आंदोलनकारी पिछले दो सालों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से सिर्फ उन्हें गुमराह किया गया है।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत द्वाराहाट, चौखुटिया के राज्य आंदोलनकारी यहां नगर पंचायत प्रांगण में एकत्रित हुए। यहां हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि राज्य के लिए संघर्ष करने के बाद भी कई राज्य आंदोलनकारी आज तक सम्मान से वंचित हैं। ऐसे आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कर दिया गया, जिनका आंदोलन से दूर-दूर तक का नाता नहीं रहा। कहा कि द्वाराहाट चौखुटिया के 12 राज्य आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित हैं, जबकि इस मांग को लेकर 2015 से वह लोग निरंतर संघर्ष कर रहे हैं।
हर बार प्रशासन ने झूठे आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त करवा लिया, लेकिन मांग को लेकर धेले भर की प्रगति नहीं हुई। इस बार राज्य आंदोलनकारी आर पार की लड़ाई लड़ेंगे। प्रशासन के झूठे आश्वासनों के माध्यम से गुमराह नहीं होंगे। स्थानीय नागरिकों से भी आंदोलन में सहयोग मांगा गया। इससे पूर्व राज्य आंदोलनकारी कैलाश फुलारा ने मोहन सिंह रावत का माल्यार्पण करने उन्हें अनशन पर बैठाया।
उनके समर्थन में मनोज अधिकारी, महेश प्रसाद, कुंदन राम, धनी राम, गोपाल सिंह, दान सिंह, नवीन चंद्र जोशी, लक्षमण सिंह, मनोहर दत्त जोशी, विशन सिंह ,राम सिंह बोरा आदि धरने पर बैठे। दो दिन बार पूर्व ज्येष्ट प्रमुख राज्य आंदोलनकारी चंदन सिंह नेगी आमरण अनशन पर बैठेंगे। अनशन को समर्थन देने वालों का तांता लगा रहा। जिनमें मोहन चंद्र तिवारी, तेज सिंह, जीवन सिंह, चंदन सिंह, गजेंद्र सिंह, प्रेम सिंह सहित तमाम लोग शामिल थे।
राज्य आंदोलनकारियों को 15 हजार रुपये पेंशन दी जाए
अल्मोड़ा। उत्तराखंड आंदोलन में हिस्सा लेने वाले कई राज्य आंदोलनकारियों ने 15 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग की है। राज्य आंदोलनकारी वीरेंद्र बजेठा, दुर्गा दत्त भट्ट, कमला जोशी और ललित मेहरा आदि ने द्वाराहाट ब्लॉक के नगर पंचायत प्रांगण में मांगों को लेकर आमरण अनशन कर रहे राज्य आंदोलनकारियों के आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने छूट गए राज्य आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कर उन्हें सुविधाएं देने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण के लिए हाइकोर्ट में मजबूत पैरवी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को प्रदेश के सरकारी अतिथि गृहों में रात्रि विश्राम, सरकारी बसों में सहवर्ती के साथ गंतव्य तक निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जाए। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी प्रमुख आंदोलनकारी संगठनों से एक मंच पर आने का आह्वान किया है।