पिछले एक हफ्ते से बामनगांव में आतंक का पर्याय बना तेंदुआ आखिरकार देर शाम मारा गया। लखपत शिकारी ने सीमापानी में इस तेेंदुए को मार गिराया। लखपत के मुताबिक करीब साढ़े सात साल के इस नर तेंदुए का ऊपर का एक दांत टूटा हुआ है और इसके गले में संक्रमण है। माना जा रहा है कि खराब स्वास्थ्य के कारण ही करीब साढ़े सात फीट का यह तेंदुआ आदमखोर बना और इसी वजह से इसने एक हफ्ते में दो महिलाओं को शिकार बनाया।
बमन गांव में रविवार को तेंदुए ने गोविंदी देवी को शिकार बनाया था। तेंदुआ सूरज डूबने के बाद गांव में पहुंचा था। इससे ठीक एक हफ्ते पहले तेंदुए ने सीमापानी में हीरा देवी (हेमा देवी) का मारा था। गोविंदी की मौत के बाद बमनगांव में लखपत सहित चार स्थानीय शिकारियों ने डेरा डाल लिया था। लखपत के करीब पौने छह बजे एक अन्य शिकारी गंगा सिंह ने फोन पर जानकारी दी कि तेंदुआ सीमापानी के निकट एक झाड़ी की ओट में बैठा हुआ है। करीब छह बजे वे सीमापानी पहुंचे। तेंदुआ उसी जगह था जहां उसने 17 दिसंबर को शिकार किया था। लखपत को इस तेंदुए को मार गिराने में बहुत अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ी। एक ही गोली से यह तेंदुआ मारा गया।
शिकारियों के मुताबिक क्षेत्र में अभी तक किसी दूसरे तेंदुए की सक्रियता के संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि यह वही तेंदुआ है जिसने एक हफ्ते में इस क्षेत्र में दो शिकार किए। लखपत का मानना है कि खराब स्वास्थ्य के कारण यह तेंदुआ आदमखोर बना। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह पुख्ता हो पाएगा कि इस तेेंदुए के आदमखोर बनने के पीछे क्या कारण थे। तेंदुए के गले में संक्रमण और घाव बता रहा है कि तेंदुआ की सेहत नाजुक हो गई थी।
लखपत ने किया 53वां शिकार
चौखुटिया। लखपत अभी तक 53 तेंदुओं का शिकार कर चुके हैं। इस साल यह उनका चौथा शिकार है। लखपत की कहानी यह बताने के लिए पर्याप्त है कि पहाड़ में वन्य जीवों की समस्या किस कदर बढ़ती जा रही है।
चार बजे गोविंदी के घर के आसपास देखा गया था तेंदुआ
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। यह तेंदुआ करीब चार बजे गोविंदी के घर के आसपास भी देखा गया था। तेंदुए से आतंकित गांव के लोगों ने उस समय गांव में शिकारियों के न होने पर नाराजगी भी जताई थी।
प्रधान राधिका देवी, मोहन राम, धनसिंह, आनंद सिंह, गीता जोशी, गोपाल सिंह, डूंगर सिंह, दिनेश जोशी, सूरज प्रकाश, मदन राम, चंदन किरौला, दीप चंद्र आदि ने बैठक की और गांव में शिकारियों को दिन में भी तैनात करने की मांग की। बाद में इन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से बात की। बाद में वन विभाग कर्मियों के साथ हुई बातचीत में तय हुआ की संबंधित कर्मी व कुछ शिकारी दिन में भी गश्त करेंगे। वन विभाग के प्रतिनिधि खुशाल सिंह अटवाल ने लोगों को बताया गया कि वन विभाग ने ट्रेंकुलाइजर टीम के भुवन टम्टा, पंकज भाकुनी, त्रिभुवन उपाध्याय, चंद्रशेखर त्रिपाठी आदि को भी अभियान पर लगाया है। गोविंदी देवी के पुत्र ललित मोहन जोशी ने बताया कि प्रशासन तथा वन विभाग द्वारा अब तक की गई कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं। सोमवार की शाम शिकारी गांव में मौजूद होते तो तेंदुआ उसी समय मारा जाता। लोगों में इसी बात की नाराजगी रही।
रात भर की गश्त, दिखाई नहीं दिया तेंदुआ
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। शिकारी लखपत सिंह रावत ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे अजय रावत के साथ सोमवार की रात करीब दस किलोमीटर के दायरे में सर्च लाईट के साथ गश्त की पर कहीं भी तेंदुआ दिखाई नहीं दिया। तेंदुए के पांव के निशान भी नहीं मिल पाए हैं। लखपत ने मंगलवार को गांव के दूसरे छोर पर गश्त करने की योजना बनाई थी। लखपत का पूरा फोकस गश्त पर ही था और उन्होंने मचान नही बनाया था। एक अन्य शिकारी ने कुत्ते को भी साथ लेकर गश्त की थी। अन्य शिकारी मंगलवार से पूरी तरह से मोर्चा संभालने की तैयारी में थे।