अल्मोड़ा। शुक्रवार शाम को यहां सर्किट हाउस के निकट जल संस्थान का टैंकर पलट गया। टैंकर पलटने के बाद चालक करीब डेढ़ घंटे तक टैंकर के भीतर फंसा रह गया। चालक के चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के कई लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन उसे बाहर नहीं निकाल सके।
वह इस तरह फंस था कि हाथ पैर भी नहीं हिला पा रहा था। काफी देर बाद पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और करीब डेढ़ घंटे बाद रिकवरी वैन के सहारे उसे बाहर निकाला जा सका। उसे बेस अस्पताल भर्ती कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक जल संस्थान का पानी का टैंकर सर्किट हाउस स्थित टैंक से केएमवीएन के पर्यटक आवास गृह के लिए पानी लेकर जा रहा था। इस बीच यह टैंकर सर्किट हाउस से कुछ दूरी पर पलट गया। जिससे चालक अनिल सिंह बिष्ट टैंकर के भीतर ही फंस गया। चिल्लाने की आवाज सुनकर कुछ लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन वह इतनी बुरी तरह फंसा था कि बाहर नहीं निकाला जा सका।
हालत यह थी कि उसके हाथ पैर भी नहीं हिल पा रहे थे। कुछ देर बाद जल संस्थान के कर्मचारी कटर लेकर आए, लेकिन उससे भी काम नहीं बना। करीब एक घंटे बाद पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान मौके पर पहुंचे। साथ ही पुलिस की रिकवरी वैन भी मंगाई गई।
रिकवरी वैन के सहारे से काफी मशक्कत के बाद चालक को बाहर निकाला जा सका। चालक को बाहर निकालने में एक घंटे से अधिक समय लग गया। संयोग से उसकी जान बच गई। उसे गंभीर हालत में बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के मुताबिक उसकी हालत में सुधार हो रहा है।
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा के जिला प्रशासन ने आपदा से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां जरूर की हैं, लेकिन टैंकर पलटने की इस घटना से प्रशासन के आपदा प्रबंधन की असलियत सामने आ गई। इसकी भले ही जो भी वजह रही हो, लेकिन लोगों का मानना है कि टैंकर पलटने के बाद चालक को बाहर निकालने में डेढ़ घंटे का समय नहीं लगना चाहिए था।
चालक इतनी बुरी तरह फंसा था कि ज्यादा वक्त लगने पर उसकी जान भी जा सकती थी। कैंट क्षेत्र में जिस जगह पर यह घटना हुई वहां से थाने की दूरी भी करीब आधा किमी है। प्रशासन इस घटना का आकलन करके आगे के लिए अपनी तैयारियों को दुरुस्त कर सकता है ताकि भविष्य में तुरंत एक्शन हो सके। उधर आपदा राहत प्रबंधन के कंट्रोल रूम का कहना है कि घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस को मौके को रवाना कर दिया था।
अल्मोड़ा। समाज में कुछ लोग इतने संवेदनहीन हैं कि दर्दनाक घटनाओं में भी अपना मकसद खोजने लगते लगते हैं। बताया गया है कि इस घटना में चालक की जान बचाने में जुटने के बजाय कुछ लोग अपने मोबाइल से ट्रक के भीतर छटपटा रहे चालक की वीडियो क्लीपिंग बनाने में लग गए।