उद्यान विभाग के अंतर्गत अल्मोड़ा के मटेला में करोड़ों की लागत से बनाए गए कोल्ड स्टोर का ताला 10 साल बाद भी नहीं खुल सका है। दक्षिण भारत क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति ने खुद को बड़ा उद्यमी बताकर राज्य के अधिकारियों और सरकार में बैठे लोगों को झांसे में ले लिया और दो करोड़ का लोन लेकर आखिरकार फरार हो गया। इस कथित उद्यमी ने कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के कई काश्तकारों से खरीदे गए लाखों रुपए के आलू, सेब आदि उपज का भुगतान भी नहीं किया। उद्यमी के फरार होने के बाद 2006 में कोल्ड स्टोर को सील कर दिया गया था जो आज तक नहीं खुल सकी है।
बता दें कि अल्मोड़ा के मटेला में राज्य बनने से पहले से ही उद्यान विभाग का कोल्ड स्टोर बना हुआ था, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते यह चालू नहीं हो सका था। 2003 में दक्षिण भारत के एक व्यक्ति ने खुद को बड़ा उद्यमी बताते हुए तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों और अधिकारियों को झांसे में ले लिया। बैनी नाम के इस कथित उद्यमी को सरकार की संस्तुति पर दो करोड़ रुपए का ऋण भी दे दिया गया।दिलचस्प यह रहा कि ऋण लेने के लिए शासन ने ही गारंटी दी।
उस दौर में उद्यान विभाग और अल्मोड़ा जिला प्रशासन के बड़े अफसर इस कथित उद्यमी के खासमखास हुआ करते थे। शासन में बैठे कई अफसरों की भी इस कथित उद्यमी के साथ ऐसी सांठगांठ रही कि काश्तकार भी उसके विश्वास में आ गए। उन्होंने लाखों रुपए के अपने आलू, सेब आदि उपज उसे बेच डाली, लेकिन काश्तकारों को भुगतान नहीं मिला। बाद में काश्तकारों के हंगामे और आंदोलन के बाद बैनी 2006 में अल्मोड़ा से फरार हो गया और फिर अधिकारी लकीर पीटते रह गए। बाद में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। लंबे समय बाद उसे गिरफ्तार करके जेल भेजा गया और कुछ माह बाद उसे जमानत भी मिल गई। जमानत पर रिहा होने के बाद बैनी कहां है यह किसी को पता नहीं है, लेकिन दो करोड़ के लोन और काश्तकारों के फलों का लाखों का भुगतान आज तक नहीं हो सका है। जिला उद्यान अधिकारी भावना जोशी ने बताया कि इस मामले की जांच शासन स्तर से चल रही है।