द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। उक्रांद ने 20 साल, कई सवाल वेबीनार कार्यक्रम में श्रीदेव सुमन की शहादत को याद किया। उन्होंने श्रीदेव सुमन के मायने, उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना आदि मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। कहा कि श्रीदेव सुमन लेखक, कवि, शिक्षक, पत्रकार होने के साथ-साथ राजशाही के खिलाफ लड़ने वाले असली जननेता थे। मांग की कि टिहरी झील का नाम श्रीदेव सुमन के नाम रखा जाए।
दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार, राज्य आंदोलनकारी चारु तिवारी के सवाल जवाब में उक्रांद के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी, केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट, पूर्व विधायक डॉ.नारायण सिंह जंतवाल, पुष्पेश त्रिपाठी, बीडी रतूड़ी, श्रीदेव सुमन संस्कृति एवं साहित्य संस्थान के अध्यक्ष डॉ. मुनिराम सकलानी ने भाग लिया।
उक्रांद नेताओं ने माना कि श्रीदेव सुमन के सपनों को साकार करने के लिए ही उनके शहादत दिवस 24-25 जुलाई 1979 को मसूरी में उत्तराखंड क्रांति दल का गठन किया गया। जिसमें एक जनकल्याणकारी, जनता के प्रति उत्तरदायी शासन की अपेक्षा की गई थी। लेकिन आज बीस साल बाद भी राज्य की हालत जस की तस है। श्रीदेव सुमन के सपनों के राज्य की हालत बेहद खराब है। नौकरशाही पूरी तरह से हावी हो चुकी है। मंत्री की बैठक में सचिव नहीं पहुंच रहे।
वक्ताओं ने कहा कि सुमन ने उत्तराखंड की बेहतरी के सपने संजोए थे। जल, जंगल, जमीन आदि पर क्षेत्र के लोगों का अधिकार मिलना चाहिए था, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। कहा कि सुमन का आंदोलन सिर्फ टिहरी की राजशाही के खिलाफ नहीं था। बल्कि वह इससे पहले आजादी के राष्ट्रीय आंदोलन से भी जुड़े थे। उन्होंने 1936 में कांग्रेस सम्मेलन में पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग की थी। श्रीदेव सुमन सहित तमाम विभूतियों को पाठ्यक्रमों में रखे जाने की वकालत की। वक्ताओं ने कहा कि श्रीदेव सुमन के आदर्शों पर आगे बढ़ना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।