रानीखेत में नए पर्यटक स्थलों का विकास तो दूर की बात, पुराने स्थलों की ही सुध नहीं ली जा रही है। विश्व विख्यात गोल्फ मैदान में पर्यटकों के लिए शौचालय की सुविधा तक नहीं है। चौबटिया का प्रख्यात सेब गार्डन स्वदेशी सेब के पेड़ कटने के बाद उजाड़ हो गया है। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री घोषणा के दो साल बाद भी दलमोटी के जंगल में मिनी अभ्यारण्य अस्तित्व में नहीं आ सका है। यह अभ्यारण्य 15 हेक्टेयर क्षेत्र में बनना प्रस्तावित था।
पर्यटन नगरी का प्रख्यात नैसर्गिक गोल्फ मैदान सैलानियों के मुख्य आकर्षण का केंद्र है। यह मैदान एशिया स्तर पर दूसरा नैसर्गिक गोल्फ मैदान है, लेकिन सैलानियों के लिए यहां शौचालय तक की सुविधा नहीं है। जाने माने फिल्म निर्देशक यहां फिल्मों की शूटिंग कर चुके हैं। निर्माता निर्देशकों की यह पसंदीदा लोकेशन है। अब तक यहां 18 से अधिक फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। हालांकि मैदान की देखरेख सेना करती है। चौबटिया के विख्यात सेब के बगीचे में कभी स्वदेशी सेब के पेड़ लदे रहते थे।
सेब की खुशबू पूरे बगीचे को महकाती थी, इसे देखने के लिए सैलानी भी खिंचे चले आते थे, लेकिन 2006 में बगीचे से स्वदेशी सेब के पुराने पेड़ काटकर अमेरिकन प्रजाति के नए पेड़ लगाए गए। अमेरिकन प्रजाति यहां सफल नहीं हो सकी। अब बगीचे से सेब की लालिमा गायब है। बगीचा पूरी तरह से उजाड़ नजर आता है। पर्यटक यहां पहुंचते जरूर हैं, लेकिन अब कड़वे अनुभव लेकर लौट रहे हैं। व्यवसायी राजेंद्र अग्रवाल उर्फ लाखन का कहना है कि पर्यटन नगरी के विकास की तरफ कोई नहीं सोच रहा है।
पर्यटक स्थलों का विकास नहीं हो रहा है। पर्यटकों के लिए मनोरंजन के साधनों का अभाव है। जिस कारण नैनीताल से पर्यटक यहां आते हैं, लेकिन रुकने के बजाए सीधे कौसानी की तरफ चले जातेे हैं, यहां डियर पार्क और रोपवे भी स्वीकृत था, लेकिन आज तक वह भी अस्तित्व में नहीं आए। इन हालातों में कैसे पर्यटन विकास होगा। दो साल पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पर्यटन विकास के लिए यहां दलमोठी के घने जंगल में मिनी अभ्यारण्य बनाने की घोषणा की। अभ्यारण्य के साथ-साथ यहां जंगल सफारी, ट्रैकिंग रूट भी विकसित होने थे। यह कार्य 15 हेक्टेयर क्षेत्र में स्वीकृत थे, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।