गगास-ताड़ीखेत पेयजल योजना से जुड़ी 38 ग्राम सभाओं में पानी की किल्लत गहराने लगी है, कई इलाकों में चार तो कहीं तीन दिन से नलों में बूंद नहीं टपकी है, लेकिन जल निगम और जल संस्थान के अधिकारी समस्या के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। दूसरी तरफ ग्रामीणों का अधिकांश समय पानी जुटाने में व्यतीत हो रहा है।
मालूम हो कि गगास-ताड़ीखेत योजना से 70 प्रतिशत पानी सेना को तथा 30 प्रतिशत पानी चिलियानौला, ताड़ीखेत, पिलखोली, गनियाद्योली सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को दिया जाता है। दूसरी तरफ पुनर्गठन के अभाव में यह योजना अब उम्रदराज हो चुकी है। आए दिन पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिस कारण समस्या उत्पन्न हो जाती है। इस बीच ग्रामीण क्षेत्रों में फिर से पानी की किल्लत शुरू हो गई है। कई इलाकों में चार चार दिनों से पानी नहीं आ रहा। जिस कारण बच्चे भी पानी जुटाते दिख रहे हैं। इधर, जल संस्थान के अभियंता मनोज पांडे ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रतिदिन उन्हें 10 लाख लीटर पानी की आवश्यकता होती है, पर्याप्त पंपिंग नहीं होने के कारण जल संस्थान एक दिन छोड़कर आपूर्ति करता है। इसके लिए भी साढ़े चार लाख लीटर पानी चाहिए, लेकिन पिछले कुछ समय से उन्हें मात्र तीन से साढ़े तीन लाख लीटर पानी ही मिल रहा है। जिस कारण समस्या उत्पन्न हो रही है।
सभी इलाकों में बारी बारी से आपूर्ति कराने के प्रयास चल रहे हैं। उधर जल निगम के सहायक अभियंता केएस गंगवार ने बताया कि पर्याप्त पंपिंग की जा रही है। सेना और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक साथ पंपिंग होती है। कभी कभार एमईएस के टैंक ओवर फ्लो हो जाते हैं तो वह पंपिंग रुकवा देते हैं। अलबत्ता पाइप लाइनें ठीक ठाक हालत में हैं।