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Almora News: लावारिस पशु गो सदन नहीं भेजे गए तो बुआई नहीं करेंगे स्याल्दे के किसान

Wed, 22 May 2024 02:14 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
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स्याल्दे में बंजर खेत। संवाद
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मौलेखाल (अल्मोड़ा)। कभी उपजाऊ खेती के लिए प्रसिद्ध चौकोट घाटी का स्याल्दे क्षेत्र आज बुआई के लिए बाट जोह रहा है। इलाके में लावारिस पशु मुसीबत बने हुए हैं, अब हालात इतने बिगड़ गए हैं कि आठ गांवों के लोगों ने ऐलान कर दिया है कि जब तक लावारिस पशुओं को गौ-सदनों में नहीं भेजा जाएगा वे बुआई नहीं करेंगे।
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स्याल्दे की कई एकड़ में फैली उपजाऊ भूमि बंजर पड़ी है। पास में बहती विनोवा नदी के सहारे कभी लोग यहां धान की खेती करते हैं लेकिन आज हालात ये हैं कि यहां इतनी झांड़ियां उग गयी हैं कि यहां जंगली जानवरों का ठिकाना बन गया है। ऐसा भी नहीं है कि यह क्षेत्र प्रशासनिक कार्यालयों से दूर किसी कोने की बात हो बल्कि यहां तहसील, विकासखंड जैसे वो ऑफिस हैं जहां बीडीओ, तहसीलदार, कृषि, उद्यान और पशु चिकित्सक के अफसर रहते हैं। इन अफसरों के रहते हुए भी एक उपजाऊ जमीन आज करीब बंजर में तब्दील हो चुकी है।
यहां तीन हजार से अधिक किसान खेती से ही अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में क्षेत्र के तिमली, पैठाना, जसपुर, भाकुड़ा, तामाढौन, कैहड़गांव, खटलगांव के किसानों ने लावारिस जानवरों को गो सदन न भेजे जाने पर बुआई न करने का निर्णय लिया है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में लावारिस जानवर हर सीजन में फसलों को चौपट कर रहे हैं। इन हालातों में किसानों का खेती करना मुश्किल हो गया है।
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इन फसलों के लिए प्रसिद्ध रहा इलाका

चौकोट घाटी मडुआ, धान, गेहूं सहित अन्य फसलों के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। पलायन के कारण आज पहाड़ में हालात ये हो गए हैं कि कोई खेती करना नहीं चाहता लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आज भी खेती को छोड़ना नहीं चाहते हैं उन किसानों की दिक्कत कि इलाके में डेढ़ सौ से अधिक लावारिस पशु खेती के लिए मुसीबत बने हुए हैं। अब किसान इतना निराश हो गया है कि उसने बुआई नहीं करने का इरादा कर लिया है।





बोले, किसान

खेती से ही क्षेत्र के किसानों की आजीविका चलती है। वर्तमान में पूरे क्षेत्र में लावारिस जानवरों की समस्या है जो हमारी मेहनत बेकार कर रहे हैं। जब तक इन्हें गो सदन नहीं भेजा जाता, हम बुआई नहीं करेंगे।



- प्रियदर्शन उप्रेती, पैठाना।





उपजाऊ जमीन है और खेती भी अच्छी होती है। लावारिस जानवर हमारी बेकार कर दे रहे हैं। ऐसे में हम खेती कैसे कर सकते हैं। मेहनत बेकार जाने से अच्छा है कि हम खेतों को बंजर छोड़ दें।
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- दौलत सिंह बंगारी, खटलगांव।





कोट



लावारिस जानवरों के लिए गो सदन बनाया जाना है। इसकी प्रक्रिया गतिमान है। जल्द लावारिस जानवरों को गो सदन भेजा जाएगा।

- भूपाल गिरी, कानूनगो, स्याल्दे।
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