ऐतिहासिक स्याल्दे बिखोती के मुख्य मेले में आल और गरख धड़े के सैकड़ों लोगों ने 17 जोड़े नगाड़े-निशानों के साथ ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। हजारों मेलार्थी इस पल के गवाह बने। घटगाड़ से ग्रामीण ढोल नगाड़ों, नगारे निशानों के साथ श्रंकार नृत्य करते हुए मेला स्थल तक पहुंचे। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। भाजपा है गे सटबटुवा, कांग्रेस है गे जालि, इन द्वी दलों ले करी है दाज्यू सारा पहाड़ा खालि जैसे झोड़ों ने समा बांध दिया।
रविवार की देर शाम पांच गरख धड़े के लोगों ने 11 जोड़े और आल धड़े ने छह जोड़े नगाड़े-निशानों के साथ ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। गरख धड़े में सलना, छतगुल्ला, बसेरा, असगोली, धन्यारी, सिमलगांव, नैंणी, बेढुली, बनोली, बूंगा और कुई तथा ऑल धड़े की ओर से बिजेपुर, पिनोली, डढोली, भौंरा, तल्ली मिरई और किरोली के ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। ग्रामीण ढोल-नगाड़ों और निशानों के साथ लाठियां लहराते हुए मेला स्थल पहुंचे। मेला देखने पहुंचे हजारों लोगों ने इस रस्म को देखा। इससे पूर्व घटगाड़ से नृत्य करते हुए ग्रामीण मेला स्थल पर पहुंचे। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला।
युवाओं के साथ ही बुजुर्गों में भी खासा जोश देखा गया। बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास भी मेला देखने पहुंचे। इस दौरान विधायक महेश नेगी, पूर्व विधायक मदन बिष्ट, पुष्पेश त्रिपाठी, मेला कमेटी अध्यक्ष विमला शाह, जगत रौतेला, पीसी तिवारी, विनोद जोशी, अनिल चौधरी, नरेंद्र अधिकारी, हेम रावत, नारायण रावत, विमल शाह, कंचन शाह सहित तमाम लोग मौजूद थेे।