देशभर में चर्चित निठारी कांड से बरी हुए सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान के अंदर उसका शव फंदे से लटका मिला। कोली की मौत की खबर के बाद अल्मोड़ा के स्याल्दे ब्लॉक स्थित मंगरूखाल गांव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। गांव में अब कोली के नाम पर उसका खंडहर हो चुका पैतृक मकान ही बचा है।
सुरेंद्र कोली मंगरूखाल निवासी शाकरू राम और कुंती देवी के चार बेटों में मझेला बेटा था। उसने सातवीं तक पढ़ाई की थी। इसके बाद वह काम की तलाश में दिल्ली चला गया। बाद में गांव की ही शांति देवी से उसकी शादी हुई। पिता की मौत के बाद उसके दो भाई भी रोजगार के लिए दिल्ली चले गए। वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी कांड में सुरेंद्र का नाम सामने आने के बाद परिवार की मुश्किलें बढ़ती चली गईं। जब वह जेल गया, तब उसकी एक बेटी थी और बेटा पत्नी के गर्भ में था। इसके बाद पत्नी शांति देवी ने दोनों बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी संभाली। गांव में बदनामी और मुश्किलों के बीच वह बच्चों के साथ करीब 10 साल पहले हरियाणा चली गईं। तब से वह न तो गांव लौटीं और न ही पति से मिलने जेल गईं। बताया जाता है कि उसने बाद में बदनामी से पीछा छुड़ाने के लिए दूसरी शादी कर ली थी। नवंबर 2025 में सुरेंद्र के दोषमुक्त होने की खबर आई, लेकिन तब परिवार में खुशी मनाने वाला कोई नहीं था। बेटे के इंतजार में मां कुंती देवी की मौत हो चुकी थी। वहीं पत्नी शांति देवी और दोनों बच्चे गांव छोड़कर पहले ही जा चुके थे।
डासना जेल में हुई थी मां और पत्नी की अंतिम मुलाकात
सुरेंद्र की मां कुंती देवी उससे अंतिम मुलाकात डासना जेल में हुई थी। इसके बाद मां बेटे के लौटने का इंतजार करती रहीं, लेकिन उनका निधन हो गया। अब सुरेंद्र की मौत के बाद मंगरूखाल में उसका खंडहर मकान ही उसके परिवार की कहानी का आखिरी निशान रह गया है।