सरकार स्कूलों का उच्चीकरण को खूब कर रही है, लेकिन इसके बाद स्कूलों में संसाधनों की व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उच्चीकरण के पांच साल बाद भी राजकीय कन्या हाईस्कूल चनौदा में पर्याप्त कक्ष नहीं बन सके। स्कूल में तीन कक्ष हैं और कक्षाएं पांच। कुछ कक्षाएं खुले आसमान के नीचे संचालित होती हैं।
बरसात के दिनों में तो एक कक्ष में दो कक्षाओं की पढ़ाई होती है। राजकीय कन्या हाईस्कूल चनौदा का उच्चीकरण 2010 में हाईस्कूल में हुआ था, लेकिन पांच साल बाद भी स्कूल में संसाधनों की कमी है।
स्कूल में सिर्फ तीन कक्ष हैं जबकि कक्षाएं पांच हैं। कुछ कक्षाएं खुले आसमान के नीचे संचालित होती हैं। तेज गर्मी में टेंट लगाकर बच्चों को पढ़ाया जाता है।
बरसात के दिनों में एक कक्ष में दो कक्षाएं चलाना मजबूरी है। स्थिति ऐसी है कि मिड-डे-मील का भोजन पकाने के लिए स्कूल में भोजन कक्ष तक नहीं है।
जिस कक्ष में बच्चे पढ़ते हैं, उसी कक्ष के एक कोने में मिड-डे मील का चूल्हा जलता है। चहारदीवारी न होने से स्कूल अवधि में कई बार लावारिस पशु स्कूल परिसर में घुस आते हैं।
स्कूल जंगल से लगा होने के कारण छात्र-छात्राओं को खतरा भी बना रहता है। बच्चों के खेलने के लिए मैदान तक नहीं है। स्कूल में प्रधानाध्यापक और लिपिक का पद खाली है।
इधर खंड शिक्षाधिकारी पीएल टम्टा ने बताया कि स्कूल में कक्ष की कमी को देखते हुए भूमि का चयन किया जा रहा है। भूमि मिलने पर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत स्कूल के कक्षा-कक्षों का निर्माण किया जाएगा।
फोटो- 11एएलएम5पी से 8पी तक