योजना काफी समय पहले स्वीकृत हो जाती है, लेकिन विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों की सुस्ती के कारण कार्य इतनी धीमी गति से चलता है कि तब तक नई योजना आ जाती है। ऐसा ही हाल राजकीय संग्रहालय का है। सातवीं से बारहवीं सदी की पुरानी विशाल प्रस्तर प्रतिमाओं को संग्रहालय के बाहर लगाने के कार्य को संस्कृति विभाग द्वारा मंजूरी दिए आठ माह से अधिक हो गया प्रस्तर प्रतिमाओं को लगाने का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
राजकीय संग्रहालय ने काफी पहले संस्कृति विभाग से संग्रहालय परिसर में सातवीं से बारहवीं सदी की प्रस्तर प्रतिमाएं लगाने की मांग की थी। जिस पर संस्कृति विभाग ने स्वीकृति देते हुए निर्माण एजेंसी ग्रामीण निर्माण विभाग को पैसा भी दे दिया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों के सुस्त रवैये के कारण मूर्ति लगाने का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
मालरोड में स्थित राजकीय संग्रहालय में सदियों पुरानी प्रतिमाएं, बहुमूल्य सिक्के समेत कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं जो कि संग्रहालय में सुरक्षित हैं, लेकिन नई योजना के अनुसार जिले के विभिन्न स्थानों से स्तंभ, वीरखंभ आदि भी परिसर में लगाने का प्रस्ताव रखा गया था ताकि बाहर से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। इसके अलावा संग्रहालय परिसर में 2015 में नानकमत्ता के खमरिया गांव से लाई गई करीब 125 साल पुरानी लोहे की नाव को भी रखा जाना है।
संग्रहालय के अनुरोध पर संस्कृति विभाग ने प्रस्तर प्रतिमा आदि लगाने के लिए 1.23 लाख रुपये निर्माण एजेंसी ग्रामीण निर्माण विभाग को दिए थे और निर्माण एजेंसी ने सर्वे भी पूरा कर लिया था पर इस कार्य को लंबे समय से पूरा नहीं किया जा सका।
इधर संग्रहालय प्रभारी संग्रहालय डा. ज्ञान प्रकाश तिवारी ने बताया कि देघाट क्षेत्र से वीर स्तंभ नहीं आने के कारण कार्य रुका हुआ है। इस संबंध में मंदिर कमेटी देघाट को पत्र भेजकर वीर स्तंभ भिजवाने के लिए कहा गया था, लेकिन अभी तक पत्र का कोई जवाब नहीं आया है।