फोटो- 20 एएलएम 7 पी- कारखाना बाजार में तैयार होते रावण कुल के पुतले। संवाद
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा का दशहरा पर्व रावण कुल के पुतले फूंकने की परंपरा को सहेजे है। 1936 में यहां रावण परिवार का पुतला फूंकने की परंपरा शुरू हुई जो निरंतर जारी है। कुल्लू के बाद अल्मोड़ा का दशहरा पर्व पूरे देश में प्रसिद्ध है। शुरुआती दौर में यहां रावण कुल के 30 पुतले जलाए जाते थे। लेकिन अब पुतलों की संख्या में कुछ कमी आई है।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व का अल्मोड़ा में इतिहास समृद्ध है। कुल्लू के बाद यहां का दशहरा पर्व पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। वरिष्ठ रंगकर्मी और संस्कृति प्रेमी नवीन बिष्ट बताते हैं कि वर्ष 1936 में जौहरी मोहल्ले में कुंभकर्ण का पुतला बनाने की शुरुआत हुई। नंदादेवी, लाला बाजार में रावण का पुतला बनाया जाता था जो आज भी जारी है। 1974 से अब तक पलटन और थाना बाजार के कलाकार मेघनाद का पुतला बनाते हैं।
15 पुतलों का होगा दहन
अल्मोड़ा। दशहरा महोत्सव समिति दशहरे के दिन दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ रावण परिवार के पुतलों की भव्य शोभा यात्रा निकालेगी। समिति के अध्यक्ष अजीत सिंह कार्की ने बताया कि रावण कुल के पुतलों की शोभा यात्रा एसएसजे परिसर के मैदान तक निकलेगी, जहां उनका दहन होगा।
विदेशी पर्यटक भी होते हैं शामिल
अल्मोड़ा। दशहरा महोत्सव समिति के अध्यक्ष कार्की ने बताया कि पुतला दहन कार्यक्रम में जिले के लोगों के साथ ही विदेशी पर्यटक भी उत्साह के साथ शामिल होते हैं। विदेशी मेहमानों को भी इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है।