जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में अधिकांश सदस्यों ने उनके क्षेत्रों की योजनाएं जिला योजना में स्वीकृत नहीं होने पर रोष जताया।
उन्होंने कहा कि जिला योजना में सभी गांवों की योजनाओं को शामिल किया जाना चाहिए। दो दिवसीय सामान्य बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, जिला पूर्ति विभागों की समस्याएं छाई रहीं।
बैठक में अधिकांश सदस्यों ने उनके क्षेत्र के ग्राम और क्षेत्र पंचायतों से पारित प्रस्तावों को स्वीकृति नहीं मिलने पर रोष जताया।
सदस्यों ने आरोप लगाया कि जिला योजना समिति में चयनित सदस्य अपने क्षेत्र से संबंधित योजनाओं को तो मंजूरी दिला रहे हैं, जबकि अन्य प्रस्तावों को जिला योजना से स्वीकृति दिलाने में रुचि नहीं लेते हैं।
बैठक में अप्रैल में हुई बैठक की कार्रवाई की पुष्टि की गई। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने को जिला पंचायत द्वारा किए जाने वाले कार्यों में तीन प्रतिशत कंटीजेंसी काटने का प्रस्ताव पारित किया गया।
सदस्यों ने लंबे समय बाद भी क्षतिग्रस्त स्कूलों के भवन नहीं बन पाने पर रोष जताया। धौलादेवी के प्रमुख पीतांबर पांडे ने कहा कि चौंसाला में जूनियर हाईस्कूल का भवन दस साल से अधूरा है।
2008 में नौ लाख रुपये आवंटित होने के बाद भी गैराड़ जूनियर हाईस्कूल का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। जवाब देते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी वीएन सिंह ने बताया कि तीन साल से रमसा का बजट नहीं मिलने से क्षतिग्रस्त स्कूलों का जीर्णोद्धार नहीं हो पा रहा है।
लोक निर्माण विभाग पर हुई चर्चा में सदस्यों ने स्वीकृति के लंबे समय बाद भी सड़कों का निर्माण शुरू नहीं होने, निर्माणाधीन सड़कों में काम की खराब गुणवत्ता और पीएमजीएसवाई में बजट कटौती पर नाराजी जताई।
जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती महरा ने सदस्यों द्वारा उठाई गई समस्याओं में विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी संबंधित सदस्यों को देने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
बैठक में डीएम विनोद कुमार, सीडीओ डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव, जलागम परिषद के उपाध्यक्ष दिनेश कुंजवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शिवेंद्र रावत, विधायक प्रतिनिधि मोहन सिंह महरा, एएमए आशा रानी बिष्ट आदि मौजूद थे।