अल्मोड़ा में एक तरफ मेडिकल कालेज खोलने की तैयारी हो रही है। दूसरी ओर मरीजों को सामान्य जांच की भी सुविधा नसीब नहीं है। डाक्टरों और तकनीशियनों के अभाव में बेस अस्पताल में आडियोमीटर, लैब कोली, ब्रोनकोस्कोट, टीयूआर, टीएमटी, इंडोस्कोपी, इको कार्डियोग्राफी मशीनें ठप पड़ी हैं। पिछले एक दशक से यह मशीनें कमरों में जंक खा रही हैं। यदि यह सभी मशीनें संचालित होती तो जनता को काफी सुविधा मिल सकती थी। पर स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर नहीं है।
करीब तीन दशक पहले अल्मोड़ा बेस अस्पताल स्थापित हुआ। आशा थी की जिले के अलावा पड़ोसी जिलों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। पर सुविधाओं में और अधिक गिरावट आ गई है। एक दशक पहले अस्पताल के लिए आडियोमीटर, लैब कोली, ब्रोनकोस्कोट, टीयूआर, टीएमटी, इंडोस्कोपी, इको कार्डियोग्राफी मशीनें खरीदी गई। ईको कार्डियोग्राफी मशीन की कीमत ही करीब पचास लाख है। यह मशीनें सालों से कमरों में बंद पड़ी हैं।
तकनीशियनों के अभाव में सालों बाद भी यह मशीनें बेस अस्पताल प्रशासन संचालित नहीं कर सका है। मशीनें चालू नहीं होने का खामियाजा पर्वतीय क्षेत्र के मरीज भुगत रहे हैं और उपचार कराने के लिए मैदानी क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं।