पर्यटकों को पहाड़ की सैर कराने के लिए सरकार वन विभाग के माध्यम से नई योजनाएं बना रही है, लेकिन पहले बनी कई योजनाएं अधूरी हैं। वन विभाग ने आठ साल पहले सौनी सहित आसपास के जंगलों में कैंपा योजना के तहत पार्क बनवाए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में यह पार्क अब फिर से जंगल बन गए हैं। बाउंड्रीवॉल, तार-बाड़ तक टूट चुकी है।
कैंपा योजना के तहत वन विभाग ने 2008-09 में सौनी स्थित रेस्ट हाउस के पास एक हेक्टेयर भूमि में बड़ा पार्क बनवाया था। छह लाख रुपये की लागत से बने इस पार्क में बच्चों के लिए झूले, हट समेत खेलकूद के संसाधन जुटाए। पार्क के पास कैंटीन खोली, सौनी डांठ तक आरसीसी पीलरों की चहारदीवारी कर तार-बाड़ लगाई गई।
पार्क को कुजगड़ नाले से बचाने के लिए सीमेंट के चेकडैम भी बनाए। पार्क को लिंक रोड के माध्यम से जोड़ा गया था। पार्क की देखरेख विभाग ने एक स्थानीय संस्था को सौंप दी लेकिन उचित देखरेख के न होने से यह योजना अधूरी रही। इस योजना के तहत बिल्लेख में वनरक्षक चौकी बनी, भूमि कटाव के लिए चेकडैम, घास रोपण, एसडीओ ऑफिस के पास दो मंजिला भवन भी बना।
बिनसर में मत्स्य पालन की योजना भी अधूरी रही, हालांकि अब सरकार वन विभाग के माध्यम से दलमोटी में अभ्यारण्य स्थापित करने की योजना बना रही है। इको टूूरिज्म के तहत ट्रैकिंग रूटों का विकास होना है। इनकी सार्थकता को लेकर भी लोग आशंकित हैं।