रानीखेत (अल्मोड़ा)। सोनी–बिनसर जंगल में प्रस्तावित पक्षी व्याख्या केंद्र की योजना शुरू नहीं हो सकी है। ईको टूरिज्म बढ़ाने और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए इस परियोजना को अहम माना जा रहा था। मगर इसकी कवायद डीपीआर से आगे नहीं बढ़ने से पर्यटकों में निराशा है।
योजना के तहत यहां एलईडी डिस्प्ले, प्राकृतिक पथ और दुर्लभ पक्षियों की जानकारी देने की व्यवस्था होनी थी। युवाओं को प्रकृति गाइड के रूप में प्रशिक्षित करने की भी योजना थी। इसके लिए वन विभाग ने करीब 1.50 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी है, लेकिन प्रस्ताव लंबित होने से काम आगे नहीं बढ़ पाया है। ईको टूरिज्म सर्किट बनने से सोनी, बिनसर और भतरौंजखान क्षेत्र आपस में जुड़कर पर्यटन मानचित्र पर उभर सकते थे। स्थानीय लोगो का कहना है कि केंद्र बनने से क्षेत्र की पहचान बढ़ेगी और पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।
बिनसर में धार्मिक पर्यटन भी बढ़ेगा
सेंटर खुलने से क्षेत्र का पर्यटन मजबूत होगा और पर्यटकों को सोनी, बिनसर और भतरौंजखान के प्राकृतिक जंगलों में हिमालयी पक्षियों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। बिनसर का आध्यात्मिक महत्व भी क्षेत्र को खास बनाता है, जहां सालभर श्रद्धालु बिनसर महादेव मंदिर के दर्शन को पहुंचते हैं। ऐसे में केंद्र के शुरू होने से धार्मिक पर्यटन को भी नया सहारा मिलने की उम्मीद है।
कोट
यह योजना क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी। सेंटर का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-तापस मिश्रा, वन क्षेत्राधिकारी, वन विभाग रानीखेत।