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कहीं स्लम न बन जाएं भविष्य के शहर

Wed, 24 Jun 2015 11:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, दन्यां (अल्मोड़ा)
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कस्बों को व्यवस्थित तरीके से बसाने को सरकार की कोई नीति नहीं है। अनियंत्रित रूप से विकसित हो रहे भविष्य के इन शहरों की बसासत के लिए तत्काल योजना नहीं बनीं तो आगे चल कर सीवरेज, जल निकासी, सड़क, पार्क, पेयजल आदि समस्याएं खड़ी होना निश्चित है। शुरुआती चरण में प्रभावी योजना नहीं बनीं तो इमारतें खड़ी होने के बाद व्यवस्था सुधारना आसान नहीं होगा। 
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जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर पिथौरागढ़ मार्ग में बसा दन्यां भनोली तहसील का सबसे बड़ा कस्बा है। बाजार क्षेत्र में चार सौ से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें हैं। इससे लगी गौली, दन्यां, बसांण आटी ग्राम पंचायतें हैं। कस्बे में दो इंटर कालेज, चार निजी स्कूल, एक प्राथमिक स्कूल, कोषागार, अस्पताल, दो बैंक, जल संस्थान, सिंचाई विभाग, आईटीआई, केएमवीएन का टीआरएच, पीडब्लूडी का गेस्ट हाउस, उद्यान विभाग की मोबाइल टीम आदि सरकारी कार्यालय स्थापित हैं। बाजार क्षेत्र की वर्तमान आबादी चार हजार से अधिक है। दो जिलों के मध्य में बसे इस कस्बे में कोई व्यवस्था नहीं है। घरों से निकलने वाला गंदा पानी पानी सड़क और रास्तों में बहता रहता है। सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं है। कूडे़ के निस्तारण की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। जगह-जगह डाला जाने वाला कूड़ा पेयजल स्रोतों तक पहुंच कर उन्हें दूषित कर रहा है। आबादी के मुताबिक पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से साल भर पानी की किल्लत रहती है।

दर्जनों गांवों को केंद्र है यह कस्बा
अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ में प्रतिदिन गुजरने वाले यात्री और माल वाहक वाहन इस कस्बे में रुकते हैं। इसके अलावा टकोली, बेलक, सुकना, दियारखोली, सिरौला, रोल, मेलगांव, मयोली, आरा सल्पड़, डसीली, पड़ाई, कुलौरी, थली, नया सिरकोट आदि दर्जनों ग्राम पंचायतों का प्रमुख बाजार भी दन्यां ही है। काश्तकार उत्पादित उपज को बेचने भी इसी बाजार में लाते हैं। हर दिन सैकड़ों लोग आवाजाही करते हैं, लेकिन सुविधाएं शून्य हैं।
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रोड साइड लैंड कंट्रोल एक्ट की नहीं परवाह
भवन निर्माण आदि के लिए यहां न तो कोई मानक हैं और न ही कोई सरकारी एजेंसी की जिम्मेदारी। जिले की अन्य सड़कों की तरह ही कस्बे की सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। यही नहीं वन पंचायत की भूमि पर भी कब्जा करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। बड़े अधिकारी और नेता आए दिन यहां से गुजरते हैं, लेकिन रोड साइड लैंड कंट्रोल एक्ट का पालन कराने की उन्हें भी चिंता नहीं है। अतिक्रमण से सड़क सिकुड़ते जाने से आए दिन जाम लगना आम बात है।
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