अल्मोड़ा। उत्तराखंड सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में उच्चीकरण कर रही है। करोड़ों लागत से ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी स्तर के नौ अस्पताल भवन बना दिए गए हैं, लेकिन डाक्टरों और तकनीशियनों की तैनाती नहीं हुई है।
इनमें से पांच सीएचसी में डाक्टरों के पद सृजित किए हैं पर अधिकांश पद खाली चल रहे हैं। चार अस्पताल सीएचसी स्तर के भवन बनने के बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर के ही हैं। डाक्टरों की तैनाती नहीं होने से लोगों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है।
प्रदेश सरकार की ओर से पिछले एक दशक में देघाट, सल्ट, लमगड़ा, जैंती, धौलादेवी, सोमेश्वर, धौलछीना, ताकुला, हवालबाग के अस्पतालों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है। करीब ढ़ाई-ढ़ाई करोड़ लागत के अस्पताल भवनों के अलावा आवासीय भवन बने हैं।
करीब दो साल पूर्व इनमें से देघाट, सल्ट, लमगड़ा, जैंती, धौलादेवी सीएचसी में डाक्टरों के पदों का सृजन सरकार ने कर दिया है। मानक के अनुसार 10-10 बैड के इन सामुदायिक स्वास्थ्य केद्रों में प्रभारी चिकित्साधिकारी, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एनेस्थिेटिक, महिला रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, दंत चिकित्सक समेत आठ डाक्टर तैनात होने चाहिए, पर इन अस्पतालों में इक्का-दुक्का ही डाक्टर तैनात हैं।
तकनीशियनों की तैनाती नहीं होने से एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड आदि मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सोमेश्वर, धौलछीना, ताकुला, हवालबाग में सीएचसी स्तर के भवन बने हैं, पर सालों बाद भी सीएचसी के मानक के अनुरूप डाक्टरों के पदों का सृजन नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि सरकार को डाक्टरों और तकनीशियनों की व्यवस्था करने के बाद ही अस्पतालों का उच्चीकरण करना चाहिए।