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कई गांवों में अब नहीं होता रामलीला का मंचन

Fri, 06 Oct 2017 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, भतरौंजखान (अल्मोड़ा)।
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किसी जमाने में क्षेत्र के कई गांवों में रामलीला का मंचन हुआ करता था और यहां की रामलीला देखने काफी भीड़ उमड़ती थी, लेकिन इनमें कई गांवों में रामलीला का आयोजन कई सालों से बंद पड़ा है। च्यूनी गांव में आखिरी बार रामलीला 1982 तक  हुई। उसके बाद आज तक रामलीला शुरूनहीं हो सकी। भतरौंजखान और रीची में 2012 के बाद से रामलीला का मंचन नहीं हो सका है। टानी गांव की रामलीला भी पहले काफी प्रसिद्ध थी लेकिन वहां 1978 से रामलीला नहीं हुई है।
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इन्हीं रामलीलाओं के माध्यम से गांवों के कलाकारों को आगे बढ़ने का मौका मिलता था। लोगों का मानना है कि हाल के वर्षों में गांव-गांव टीवी के कार्यक्रम पहुंच गए हैं जिससे लोगों का रामलीला के प्रति रुझान कम हो गया है। गांवों में आर्थिक और अन्य कारणों से भी रामलीला का आयोजन मुश्किल होने लगा है। अब इस इलाके में पंतगांव और सिरमोली में रामलीला का आयोजन होता है।  

ग्रामीण इलाकों में काफी लोकप्रिय होते हैं रामलीला के कलाकार  
रामलीला के कलाकार स्थानीय स्तर पर काफी लोकप्रिय हुआ करते हैं। च्यूनी निवासी गोविंद बल्लभ पंत ने कई साल तक रावण का अभिनय किया। उन्हें इतनी प्रसिद्धि हासिल थी कि उन्हें रावण के अभिनय के लिए मासी, चौखुटिया, ऊंचाकोट, सौनी सहित तराई की पर्वतीय रामलीलाओं का निमंत्रण आया करता था। हऊली के दिवान सिंह और बमनगांव के तारा दत्त को लोग रावण के नाम से ही पहचानते हैं।
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बल्कि इनके परिवारों को भी रावण से ही इंगित किया जाता है। लोग यह भी बताते हैं कि पूर्व में रामलीला का अभिनय करने वाले कलाकार पूरा दिन व्रत रखते थे।                                                              
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