रानाीखेत (अल्मोड़ा)। सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा कि सेना अब बदलाव के दौर से गुजर रही है। सैनिकों को भी नए जज्बे के साथ देश की सेवा करनी होगी। उन्होंने कहा कि कुमाऊं और नागा रेजिमेंट का गौरवशाली इतिहास रहा है।
सेना प्रमुख जनरल पांडे शुक्रवार को हवाई मार्ग से चौबटिया पहुंचे। यहां से सड़क मार्ग से वह रानीखेत स्थित सोमनाथ मैदान पहुंचे। सोमनाथ मैदान में कलर प्रजेंटेशन कार्यक्रम के दौरान भव्य परेड निकाली गई। सेना प्रमुख जनरल पांडे ने परेड का निरीक्षण किया। इस दौरान सैनिकों में खासा उत्साह देखा गया। सेना प्रमुख ने नागा रेजिमेंट के कार्यों की सराहना करते हुए उनकी पीठ थपथपाई और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सभी रैंकों के सैनिकों की सराहना करते उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। वहां कुमाऊं रेजिमेंट केंद्र के कमांडेंट ब्रिगेडियर गौरव बग्गा, पूर्व ले. जनरल मोहन चंद्र भंडारी समेत सीनियर और जूनियर अधिकारी मौजूद रहे। संवाद
नागा रेजिमेंट के प्रमुख ऑपरेशन
- ऑपरेशन रोमियो
- 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध
- संयुक्त राष्ट्र मिशन
- कारगिल युद्ध
नागा रेजिमेंट का इतिहास
- नागा रेजिमेंट भारतीय सेना की एक पैदल सेना रेजिमेंट है। पहली बटालियन 1970 में रानीखेत में स्थापित की गई थी। नागा रेजिमेंट की तीन बटालियन अस्तित्व में है।
- 1 नागा रेजिमेंट को छह मई 1978 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने देहरादून में 'कलर्स' प्रदान किया।
-2 नागा रेजिमेंट को 10 मई 1990 को जनरल वीएन ने 'कलर्स' प्रदान किया था।
-3 नागा रेजिमेंट को 13 अक्तूबर को रानीखेत में थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, एडीसी द्वारा 'कलर्स' प्रदान किया ।
नागा रेजिमेंट ने ये अलंकरण और पुरस्कार जीते
एक महावीर चक्र, आठ वीर चक्र, एक कीर्ति चक्र (मेजर डेविड मैनलुन) मरणोपरांत।
छह शौर्य चक्र, एक युद्ध सेवा पदक, एक विशिष्ट सेवा पदक, 48 सेना पदक।