गर्मी के दस्तक देते ही ग्रामीण इलाकों में पानी का संकट गहराने लगा है। सल्ट विकासखंड के आधा दर्जन से अधिक गांवों में लोग पानी के लिए काफी परेशान हैं। पेयजल योजना में नाममात्र की पेयजल आपूर्ति हो रही है। नौलों में भी सुबह से भीड़ एकत्र हो रही है। ग्रामीणों का पूरा दिन परिवार और मवेशियों के लिए पानी जुटाने में ही बर्बाद हो रहा है। सड़कों के आसपास कई जगह टैंकरों से पानी बांटा जा रहा है।
गर्मी की दस्तक देते ही सल्ट विकासखंड के कई गांवों में पानी का संकट गहरा गया है। इस बार शरद ऋतु में बारिश बहुत कम हुई। इसका असर अब दिखाई देने लगा है। बारिश कम होने के कारण पेयजल योजना के स्रोत में पानी सूखने लगा है। इस कारण क्वैरला, डभरा, रतखाल, डोटियाल, सकनणा, टिटोली, ईड़ाकोट समेत आधे दर्जन से अधिक गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। स्थिति यह है कि स्टैंड पोस्टों में चार दिनों में एक बार पानी की बूंद टपक रही है। गांवों के नौले में पानी के लिए सुबह से ही लोगों की भीड़ लग रही है। कई घंटे इंतजार करने के बाद ग्रामीणों को बमुश्किल दो बाल्टी पानी मिल पा रहा है।
सड़क के आसपास के आबादी वाले क्षेत्र में पेयजल टैंकरों से पानी वितरित किया जा रहा है, जबकि दूरस्थ गांव में न तो हैंडपंप हैं और न ही पेयजल टैंकर पहुंच पाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को पानी के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। टिटोली की उप प्रधान अनीता तिवारी ने बताया कि परिवार और मवेशियों के लिए पानी जुटाने में ही पूरा दिन बर्बाद हो रहा है। कई बार रात भर नौले में इंतजार करने के बाद भी पानी नहीं मिल पाता है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष शिवेंद्र रावत ने कहा कि सड़क के आसपास के आबादी क्षेत्र में पेयजल वितरण टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाए। इधर ज्येष्ठ प्रमुख कुंदन बिष्ट ने प्रशासन से दूरस्थ गांवों में खच्चरों से पानी पहुंचाने की मांग की है।