ध्यूली रौतेला स्कूल भवन में पड़ी बड़ी-बड़ी दरारें
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केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा के क्षेत्र में काफी बजट खर्च कर रही हैं, लेकिन सालों बाद भी लमगड़ा ब्लॉक में राजकीय हाईस्कूल ध्यूली रौतेला का भवन नहीं बन सका है। 17 जुलाई को हुई भारी बारिश से जूनियर कक्षाओं का भवन पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। जिस कारण कक्षा छह, सात और आठ में अध्ययनरत 149 बच्चों के बैठने के लिए स्थान नहीं है। बारिश होने पर बच्चों की छुट्टी करनी पड़ रही है।
जूनियर हाईस्कूल ध्यूली रौतेला का 2011 में हाईस्कूल में उच्चीकरण हुआ। कक्षा छह सात और आठ की कक्षाएं पुराने भवन में चल रही थीं। जबकि हाईस्कूल कक्षाओं के लिए दो कक्ष नए बने हैं। मानक के अनुसार हाईस्कूल का भवन पांच साल बीतने के बाद भी नहीं बन पाया है। 2010 की आपदा में जूनियर कक्षाओं का आधा भवन क्षतिग्रस्त हो गया था। दो कमरे ठीक थे, जिनमें कक्षा छह, सात और आठ के 149 बच्चों को शिक्षण कराया जा रहा था, लेकिन गत 17 जुलाई को हुई भीषण बारिश से जूनियर कक्षाओं का पूरा भवन क्षतिग्रस्त हो गया है। ऐसे में अब जूनियर की तीन कक्षाओं को संचालित करने के लिए कक्ष नहीं हैं। इसकी सूचना शासन-प्रशासन और विभाग के उच्चाधिकारियों को भी दे दी गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
हालांकि हाईस्कूल कक्षाओं के लिए पांच लाख रुपये की लागत से दो कक्ष बने हैं। एक कक्षा मेे नवीं और दसवीं की कक्षाएं संचालति होती हैं। मौसम ठीक होने पर छह, सात और आठ के बच्चों को बाहर बैठाकर कक्षाएं चलाई जाती हैं। बारिश होने पर जूनियर कक्षाओं के बच्चों की छुट्टी कर दी जा रही है। इस कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है और विभाग उदासीन बना हुआ है।
शासन और विभाग की स्कूल के प्रति उदासीनता से क्षेत्र के अभिभावक खासे क्षुब्ध हैं। स्वतंत्रता दिवस पर अभिभावकों ने आपसी सहयोग से स्वयं टिनशेड बनाने का निर्णय लिया है। ताकि बच्चों की कक्षाएं संचालित हो सकें। एसएमसी अध्यक्ष देवेंद्र सिंह अधिकारी, सामाजिक कार्यकता केशर सिंह रौतेला, प्रधान श्याम सुंदर सिंह बगडवाल, अभिभावक संघ अध्यक्ष राम सिंह बगडवाल, पूर्व सूबेदार खड़क सिंह रौतेला ने स्कूल का भवन नहीं बनने पर रोष जताया है।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत स्कूल भवन निर्माण के लिए धनरशि मंजूर है। चार बार विभाग ने निविदाएं आमंत्रित कर दी हैं, लेकिन किसी भी ठेकेदार ने टेंडर नहीं डाला। विभाग ने अब पुन: संशोधित आंगणन तैयार कर शासन को भेजा है।