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सीतापुर नेत्र अस्पताल के वजूद पर संकट

Tue, 07 Feb 2017 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
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रानीखेत का सीतापुर नेत्र चिकित्सालय - फोटो : अमर उजाला
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। तमाम कोशिशों के बावजूद नगर के सीतापुर नेत्र चिकित्सालय की हालत नहीं सुधर पा रही है। देखरेख के अभाव में इसके भवन असामाजिक तत्वों का अड्डा बने हैं। डॉक्टर आदि स्टाफ के आवासों की हालत भी बेहद दयनीय है। कभी आंखों के बड़े ऑपरेशनों के लिए विख्यात इस अस्पताल में अब सप्ताह में एक बार डॉक्टर, फार्मेसिस्ट आकर औपचारिकता मात्र निभा रहे हैं। इसकी भूमि की लीज समाप्त होने के बावजूद छावनी परिषद ने लीज वापस नहीं ली है। 
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शिव मंदिर के पास छावनी परिषद की इस भूमि पर 1960 से पूर्व सामान्य अस्पताल था, 1962 में छावनी परिषद ने यहां प्राइमरी स्कूल की स्थापना की। कुछ साल तक स्कूल चला। 1965 में सीतापुर अस्पताल प्रबंधन ने छावनी परिषद से 3.50 एकड़ भूमि 30 साल के लिए लीज पर ली। भूमि को भवन सहित लीज पर लेकर यहां आंखों का बड़ा अस्पताल खुला। उस वक्त आंखों के अस्पताल बहुत कम थे, भतरौंजखान, भिकियासैंण, सल्ट, चौखुटिया, द्वाराहाट सहित पूरे उपमंडल के नेत्र रोगी यहां इलाज को आते थे।

तब यहां डॉक्टर, फार्मेसिस्ट, वार्ड ब्वाय सहित भरा पूरा स्टाफ था। आंखों के ऑपरेशन भी यहीं होते थे। 1969 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. चंद्रभानु गुप्ता ने इस स्थान पर डॉक्टरों के आवास के लिए भवन बनवाया, लेकिन अब देखरेख के अभाव में यह भवन जर्जर है।
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यहां असामाजिक तत्वों का अड्डा रहता है। जिसके चलते आस पड़ोस के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल की देखरेख कर रहे संतोष यादव का कहना है कि 1980 के बाद कई स्थानों पर आंख के अस्पताल खुले, लैंस प्रक्रिया शुरू हो गई, तो अब रोगियों की संख्या कम हो गई है। दूसरी तरफ 1995 में भूमि की लीज भी खत्म हो चुकी है, लेकिन छावनी परिषद ने अभी तक लीज वापस नहीं ली है।     
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