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एक तरफ तकनीकी शिक्षा को बढ़ाने के दावे, दूसरी तरफ पुराने संस्थानों को बंद करने की साजिश

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चिलियानौला में इसी भवन में चलता है आईटीआई केंद्र। अमर उजाला - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। एक ओर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास चल रहे हैं, वहीं सरकार पुराने तकनीकी शिक्षण संस्थाओं को बंद करने पर तुली हुई है। रानीखेत के एकमात्र आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) को बंद करने की सुगबुगाहट का जनसंगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि रानीखेत के आईटीआई में दो साल से प्रवेश नहीं हुए हैं। जनसंगठनों का कहना है कि यदि आईटीआई को बंद किया गया तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
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पर्वतीय क्षेत्रों से युवाओं का निरंतर पलायन क्षेत्र की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को बयां कर रहा है। तमाम अभावों के बीच क्षेत्र में वर्षों पूर्व स्थापित आईटीआई केंद्र जहां अपने वजूद को बचाने की जंग लड़ रहे हैं वहीं तंत्र के नुमाइंदे अभावग्रस्त संस्थानों की व्यवस्था नहीं सुधार पा रहे हैं। रानीखेत में 1986 में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्वीकृति हुई, लेकिन भवन के लिए भूमि आज तक नहीं मिल पाई।
स्थापना के वक्त जहां इस केंद्र में इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रीशियन, मोटर मैकेनिक, हिंदी आशुलिपि ट्रेड में प्रशिक्षण दिया गया। लेकिन राज्य बनने के बाद 2002 में मोटर मैकेनिक का प्रशिक्षण बंद हुआ और मशीनें हल्द्वानी आईटीआई में शिफ्ट कर दी गईं। 2007 में हिंदी आशुलिपि का प्रशिक्षण भी बंद है। अगस्त 2013 इलेक्ट्रिनोक्सि ट्रेड भी बंद है। वर्तमान में संस्थान में मात्र इलेक्ट्रिकल द्वितीय ट्रेड संचालित हो रहा है।
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अब बताया जा रहा है कि पिछले दो सालों से एक भी बच्चे ने प्रवेश नहीं लिया है। आईटीआई केंद्र में नए विषय खोलने की बजाय इसे बंद करने की तैयारी चल रही है। केंद्र में रेगुलर स्टाफ भी नहीं है। इधर, आईटीआई को बंद किए जाने की सुगबुगाहट से इसका विरोध भी शुरू गया है। देव भूमि क्रांति मंच उत्तराखंड के अध्यक्ष रविंद्र चंद्र जोशी ने कहा कि आईटीआई बंद हुआ तो आंदोलन होगा।
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