इसी शिव मंदिर में लगता है मेला।
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मिनी स्याल्दे बिखौती के नाम से विख्यात चिलियानौला का महाशिवरात्रि मेला 24 फरवरी को शुरू होगा। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार भी नगाड़े, निशानों, छोलिया नृत्य के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। हालांकि अब नगाड़े, निशानों की संख्या कम हो गई है। पूर्व में ग्रामीण क्षेत्रों से 12 जोड़े नगाड़े, निशान, छोलिया नृत्य करते हुए कलाकार जहां युवाओं को प्राचीन संस्कृति का बोध कराते थे, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों का भरपूर मनोरंजन करते थे। खास बात यह थी कि संसाधनों के अभाव में दूर दराज के ग्रामीण मेला देखने के लिए एक दिन पहले आ जाते थे।
चिलियानौला में शिवरात्रि मेले की शुरुआत 1904 के आसपास हुई। ताड़ीखेत ब्लॉक के पांडेकोटा, कपीना, सौनी, ताड़ीखेत, रानीखेत, मवड़ा, गवड़ा, कारचूली, पंतकोटली, वलना और सिलोर क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोग मेला देखने पहुंचते थे। बधांण और आसपास के गांवों से आने वाले 12 जोड़ी नगाड़े, निशान और कलाकारों का श्रृंगार नृत्य आकर्षण का केंद्र था। नगाड़े, निशान लेकर ग्रामीण एक दिन पूर्व चिलियानौला आ जाते थे। उस समय गांवों में बाजारों का आभाव था, मेले में श्रृंगार, खाद्य सामग्रियों की दुकानें सजती थीं। इसके बाद मेला और अधिक भव्य रूप से मनाया जाने लगा।
इस मेले को मिनी स्याल्दे बिखौती मेले के रूप में जाना जाता था। हालांकि आज भी शिवरात्रि का मेला लगता है, लेकिन नगाड़े, निशानों की संख्या घटकर एक जोड़ा रह गई है, लेकिन मेला कुमाऊं की प्राचीन संस्कृति का बोध कराता है। बधांण गांव के ग्रामीण अब हैड़ाखान मंदिर से नगाड़े, निशानों के साथ बाजार में प्रवेश करते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची रहती है।
फोटो: 21 आरकेटी 02पी: चिलियानौला का प्रख्यात शिव मंदिर, यहीं होता है शिवरात्रि मेला।