फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पितृपक्ष दो से, अष्टमी का श्राद 10, नवमी का 11 सितंबर को होगा

विज्ञापन
विज्ञापन
अल्मोड़ा। पितृपक्ष यानी महालया श्राद्ध दो सितंबर से शुरू होंगे। पितृपक्ष में पूर्वजों के लिए विधि विधान से श्राद्ध करने से न सिर्फ पूर्वजों को तृप्ति मिलती है बल्कि श्राद्ध करने वालों को भी पुण्य फल मिलता है। श्राद्ध पक्ष में तामसिक वस्तुओं का सेवन वर्जित माना गया है।
विज्ञापन

ज्योतिषाचार्य डॉ. मदनमोहन पाठक ने बताया कि श्राद्ध पक्ष दो सितंबर से शुरू होंगे। इस बार अष्टमी का श्राद्ध 10 सितंबर और नवमी का श्राद्ध 11 सितंबर को होगा। पितृ विसर्जन अमावस्या 17 सितंबर को है। इसके बाद अधिमास शुरू हो जाएगा। श्राद्ध पक्ष में संध्या गायत्री को छोड़कर संपूर्ण देव कार्य वर्जित हैं। जिन लोगों के माता-पिता या दोनों में एक नहीं है, उन सबको श्रद्धा के साथ नियमित माता, पिता के निमित्त तर्पण करना चाहिए। तर्पण का मतलब अपने पितरों की तृप्ति के लिए उनका ध्यान करके तिल, कुशा, जौ लेकर पानी की अंजलि भरकर तांबे के बर्तन में छोड़ दें। पिता, दादा, परदादा, माता अम्मा, बूढ़ी अम्मा, नाना, परनाना, बूढ़े नाना-नानी, परनानी, बूढ़ी नानी और अपने वह वंशज जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, सभी का स्मरण करके अंजलि में जल भरकर तर्पण दें। पंडित पाठक के मुताबिक कभी क्रोध न करें। लोभ दंभ, छल, कपट से दूर रहे। शुद्ध शतोगुणी भोजन करें। तामसिक चीजों का सेवन न करें। इन नियमों का पालन नकरने से पितरों को दुख पहुंचता है। श्राद्ध के दिन पितरों के निमित्त ऋतुफल, ककड़ी, दाड़िम, अखरोट, खीर रायता पुड़ी, दाल, चावल से उन्हें तृप्ति करें। ब्राह्मण को भोजन कराएं।
गौ माता को दें पहला ग्रास
अल्मोड़ा। गाय में 33 कोटी देवी-देवताओं का वास माना गया है। श्राद्ध पक्ष में इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। श्राद्धों में पितरों के निमित्त गाय को नियमित ग्रास खिलाना चाहिए। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
विज्ञापन

इस बार श्राद्ध के एक माह बाद शुरू होंगे नवरात्र
अल्मोड़ा। हर साल पितृ अमावस्या के खत्म होते ही अगले दिन से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाते हैं लेकिन इस बार पितृपक्ष की समाप्ति के ठीक अगले दिन से शारदीय नवरात्र शुरू नहीं होंगे। पितृ पक्ष की समाप्ति के एक महीने बाद 17 अक्तूबर से नवरात्र शुरू होंगे। इस बार अधिमास के कारण ही दशहरा 26 अक्तूबर और दिवाली 14 नवंबर को मनाई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें