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पांच साल के लिए देवी को अर्पित किया शामा का जंगल

Wed, 28 Jan 2015 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कपकोट (बागेश्वर)।
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वन पंचायत को लगातार हो रहे नुकसान से बचाने के लिए शामा के ग्रामीणों ने सोमवार को विधि-विधान से देवी को जंगल अर्पित कर दिया। माता पांच साल तक जंगल की सुरक्षा करेंगी। ग्रामीणों ने पेड़ों पर देवी के ध्वज के प्रतीक लाल झंडे लगा दिए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि जंगल नहीं बचेगा तो पर्यावरण को गंभीर खतरा हो जाएगा।
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वन पंचायत शामा में लंबे समय से बांझ, बुरांश, जलौनी और अन्य इमारती पेड़ों को दूसरे गांवों के कुछ लोग लंबे से नुकसान पहुंचाते आ रहे रहे थे। अवैध कटान को रोकने के लिए ग्रामीणों ने खुद भी छापेमारी की। कई बार चोरी छिपे पेड़ काटने वाले लोगों को औजार और रस्सियां समेत पकड़ा। तब चेतावनी के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। पेड़ोें के अवैध कटान में लगे अराजक तत्वों ने दिन में पेड़ काटने तो बंद कर दिए। कुछ समय बाद उन्होंने रात के अंधेरे का सहारा लेकर पेड़ों पर आरी चलानी शुरू कर दी। वन में कीमती पेड़ों की संख्या लगातार कम होते गई। पेड़ों के कटने से जहां बरसात में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ती गई।

वहीं जानवरों के लिए चारे और इमारती लकड़ी का अकाल होने का खतरा भी बढ़ गया। सरपंच हयात सिंह कोरंगा और पूर्व बीडीसी सदस्य नरेंद्र सिंह कोरंगा ने बताया कि पेड़ नहीं बचेंगे तो पर्यावरण कैसा सुरक्षित रहेगा। बाढ़, भूस्खलन का खतरा बढ़ने के साथ ही पानी का संकट भी गहराएगा। उन्होंने कहा कि अराजक तत्वों पर नकेल कसने की कई बार कोशिश की गई लेकिन वह अपनी करतूत से बाज नहीं आए। अब देवी मां ही जंगल की सुरक्षा करेंगी। जंगल से सूखी लकड़ी और सूखी पत्तियां लाने में मनाही नहीं है। लेकिन पेड़ों पर आरी चलाने पर सख्त मनाही है। देवी मां के साथ ही ग्रामीण भी पेड़ों पर पैनी नजर रखेंगे। 
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