कपकोट के शामा स्थित भेड़ प्रजनन केंद्र पर कश्मीर की मैरीनो और आस्ट्रेलिया की रैंबुलेट नस्ल की भेड़ें पालने के लिए प्रजनन का दूसरा चरण शुरू हो गया है। इस बार कश्मीर की दो नर मैरीनो से कश्मीर और आस्ट्रेलिया की 50 मादा भेड़ों पर प्रजनन कराया जा रहा है। इस तकनीक से पूर्व मेें पैदा हुए 21 मेमने स्वस्थ्य हैं। इस सफलता से पशुपालन विभाग के अधिकारी उत्साहित हैं।
पिछले वर्ष राज्य मेें भेड़ बकरी विकास विभाग की स्थापना के बाद पशुपालन विभाग ने भेड़ों की नस्ल सुधार का कार्यक्रम शुरू किया था। भेड़ प्रजनन केंद्र के प्रभारी डा. केएस रंजन ने बताया कि केंद्र पर पहला प्रयाग प्रयोग सफल रहा। अब इस प्रजाति के विकास का दूसरा चरण शुरू किया गया है।
इस बार कश्मीर से पांच मैरीनो नर भेड़ लाए गए हैं। इनके माध्यम से प्र्रजनन कराने के लिए लाई गई मादा भेड़ों में 25 कश्मीर की मैरीनो और 25 आस्ट्रेलिया की रैबोलेट भेडे़ं हैं। बताया मैरीनो, रेंबोलेट नस्ल की भेड़ें उत्तराखंड की परंपरागत भेड़ों से अधिक गठीली, ऊंची होती हैं। इनकी ऊन सर्वोच्च कोटि की, अधिक बारीक और मुलायम होती हैं। अगले कुछ साल में उत्तराखंड भेड़ पालन की दिशा मेें अच्छी प्रगति कर सकेगा।